साहित्‍यकारों के पत्र विद्याधर शुक्‍ल के नाम

हमें इलाहाबाद से निकलनेवाले साहित्यिक पत्र 'लेखन' के चर्चित संपादक श्री विद्याधर शुक्‍ल के नाम लिखे गए सैकड़ों पत्र प्राप्‍त हुए हैं। ये पत्र पिछले तीस चालीस वर्षों में समकालीन लेखकों ने उन्‍हें लिखे हैं। इन पत्रों से नए जनवादी साहित्‍य के स्‍वरूप निर्माण का परिवेश परिभाषित होता है। जनवादी साहित्‍य की समानांतर धारा के साहित्‍य की गतिविधियों का भी पता चलता है। जिन लेखकों के पत्र हमें प्राप्‍त हुए हैं उनके नाम हैं :- हंसराज रहबर, भगवत शरण उपाध्‍याय, नेमिचंद्र जैन, भीष्‍म साहनी, शेखर जोशी, चंद्रबली सिंह, विजेन्‍द्र, विजय मोहन सिंह, शिवकुमार मिश्र, विष्‍णुचंद्र शर्मा, स्‍वयंप्रकाश, बुद्धिनाथ मिश्र, क्षेमचंद्र सुमन, कमल किशोर गोयनका, इंद्रनाथ मदान, भगवान सिंह, जानकी प्रसाद शर्मा, आलम शाह खान, ओम गोस्‍वामी, जीतेन्‍द्र भाटिया, आनंद प्रकाश, बटरोही, जीवन सिंह, विजेंद्र अनिल, वाचस्‍पति, सकलदीप सिंह, हृदयेश, मिथिलेश्‍वर, विश्‍वेश्‍वर, नीलकांत, राजेन्‍द्र राव, नवल किशोर, कुमार विमल, सव्‍यसाची आदि।

हंसराज रहबर का पत्र हंसराज रहबर का पत्र विद्याधर शुक्ल के नाम


नेमिचंद्र जैन का पत्र नेमिचंद्र जैन का पत्र विद्याधर शुक्ल के नाम


यशपाल और अश्क के पत्र, मधुरेश के नाम

यशपाल  का पत्र मधुरेश के नाम अश्क  का पत्र मधुरेश के नाम

हिंदी के कालजयी लेखक यशपाल और उपेंद्रनाथ अश्क से प्रसिध्द लेखक मधुरेश का लम्बा पत्र व्यवहार रहा है। मधुरेश जी से संग्रहालय को इन दोनों लेखकों के सैंकड़ों पत्र प्राप्त हुए हैं। हम जल्दी ही इन में से कुछ प्रमुख पत्रों को आपके सामने रखेंगे। पत्रों का विवेचन-विश्लेाषण भी प्रस्तुत करेंगे। ये पत्र अपने समय के दस्तांवेज हैं।


प्रेमचंद्र के अप्रकाशित पत्र