|
|
भाषा विद्यापीठ

आज की रोजगारोन्मुख एवं प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को देखते हुए हिंदी भाषा को एक नवीन दृष्टि और दिशा देना महत्त्वपूर्ण हो जाता है, चाहे वह भाषा का सैध्दान्तिक दृष्टिकोण हो या अनुप्रयोगात्मक क्षेत्र अथवा अभियांत्रिकी या प्रौद्योगिकी पक्ष, इनसे जुड़े बिना आज हिंदी का समुचित विकास तथा संवर्धन संभव नहीं हो सकता। इस अवधारणा को केन्द्र में रखते हुए हिंदी को अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में स्थापित करने के लक्ष्य प्राप्ति हेतु भाषा-विद्यापीठ की स्थापना की गई है। भाषा-विद्यापीठ के अंतर्गत संचालित विभागों/केन्द्रों के आवश्यकतानुरूप अद्यतन विभागीय प्रयोगशालाओं की स्थापना की गयी है।
विभाग/केन्द्र
हिंदी वर्तमान कम्प्यूटर-क्रांति के परिप्रेक्ष्य में जब अपने वैश्विक प्रसार के लक्ष्यों को साधित करने की ओर बढ़ती है, तब न सिर्फ कम्प्यूटर पर हिंदी की प्रभावशाली उपस्थिति की अपेक्षा की जाती है, बल्कि विश्व का अंतर-भाषिक परिदृश्य भी एक चुनौती के रूप में सामने आता है। यह स्थिति बहुभाषिक वैश्विक फलक के साथ-साथ भारत जैसे बहुभाषिक-बहुसांस्कृतिक देश की सामाजिक संरचना पर भी दृष्टिगत होता है। स्पष्ट है कि जब तक हिंदी को अन्य भाषा-भाषी समाज से बेहतर समन्वय तथा ज्ञान-विज्ञान की समस्त विधाओं से सूचना-क्रांति की भाषा के रूप में नहीं जोड़ा जाता तब तक हिंदी के वैश्विक प्रसार के लक्ष्यों को नहीं प्राप्त किया जा सकता । इन्हीं लक्ष्यों पर केन्द्रित भाषा-विद्यापीठ निम्नलिखित विभाग/केन्द्र की स्थापना के साथ भविष्य की ओर उन्मुख हैं।
प्रस्तावना
भूमंडलीकरण के इस युग में विश्व की दूसरी सबसे बड़ी भाषा हिंदी को प्रौद्योगिकी से जोड़ कर हिंदी के सर्वांगीण विकास हेतु भाषाविज्ञान के सैध्दान्तिक एवं अनुप्रयुक्त क्षेत्र, शोध-प्रविधि, भाषा शिक्षण, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भाषा तथा प्राकृतिक भाषा संसाधन एवं अनुप्रयोग आदि विषयों के अध्ययन के लिए निम्नलिखित पाठ्यक्रमों का संचालन इस विभाग के अंतर्गत हो रहा है।
पाठ्यक्रम :
- एम. ए. हिंदी (भाषा-प्रौद्योगिकी)
यह दो वर्षीय नियमित पाठ्यक्रम है, जिसके अंतर्गत हिंदी भाषाविज्ञान के सैध्दान्तिक एवं अनुप्रयुक्त क्षेत्र यथा- भाषा, भाषा-परिवार, ध्वनि-विज्ञान, रूप-विज्ञान, वाक्यविज्ञान, अथविज्ञान, शैलीविज्ञान, कोशविज्ञान, भाषाशिक्षण, अनुवाद-विज्ञान, समाज-भाषाविज्ञान, मनोभाषाविज्ञान, प्रौद्योगिकी की अवधारणा, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भाषा, प्राकृतिक भाषा संसाधन आदि का अध्ययन किया जाता है।
64 क्रेडिट का यह पाठ्यक्रम चार छमाहियों में पूर्ण होता है। इसके साथ ही कंप्यूटर का अध्ययन अनिवार्य है, जो प्रत्येक छमाही में 2 क्रेडिट का होता है।
योग्यता : किसी भी अनुशासन में न्यूनतम 40 प्रतिशत (अनुसूचित जाति तथा जनजाति के लिए 35 प्रतिशत) अंको के साथ किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (10+2+3 पाठ्यक्रम) परीक्षा उत्तीर्ण ।
- एम. फिल. हिंदी (भाषा-प्रौद्योगिकी)
इस पाठ्यक्रम के अंतर्गत शोध-प्रविधि, भाषा शिक्षण, प्रयोजनमूलक हिंदी, भाषा-प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भाषा, प्राकृतिक भाषा संसाधन एवं अनुप्रयोग आदि का अध्ययन किया जाता है। विद्यार्थी अपना लघु शोध-प्रबंध लेखन कार्य सैध्दांतिक भाषाविज्ञान या अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान के किसी भी क्षेत्र में कर सकता है।
यह एक वर्षीय नियमित पाठ्यक्रम 22 क्रेडिट का होता है, जो दो छमाही में पूर्ण होता है। प्रथम छमाही में नियमित कक्षाएँ होगी, जिसमे 12 क्रेडिट के तीन प्रश्न पत्र होंगे और द्वितीय छमाही में विद्यार्थी 8 क्रेडिट का लघु शोध-प्रबंध पूर्ण करेंगे और 2 क्रेडिट की मौखिक परीक्षा होगी ।
योग्यता : भाषाविज्ञान/अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान/भाषा-प्रौद्योगिकी/अनुवाद-प्रौद्योगिकी/कंप्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स में न्यूनतम 55 प्रतिशत (अनुसूचित जाति तथा जनजाति के लिए 50 प्रतिशत) अंको के साथ किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर (एम. ए.) परीक्षा उत्तीर्ण ।
- पी-एच. डी. हिंदी (भाषा-प्रौद्योगिकी)
इस पाठ्यक्रम के अंतर्गत शोधार्थी सैध्दांतिक भाषाविज्ञान या अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान के किसी भी क्षेत्र में अपना शोध कार्य कर सकता है।
योग्यता :(क) भाषाविज्ञान/अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान/भाषा-प्रौद्योगिकी/अनुवाद-प्रौद्योगिकी/कंप्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स में न्यूनतम 55 प्रतिशत (अनुसूचित जाति तथा जनजाति के लिए 50 प्रतिशत) अंकों के साथ किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर (एम. ए.) परीक्षा उत्तीर्ण ।
अथवा
(ख) किसी भी अन्य अनुशासन में न्यूनतम 55 प्रतिशत (अनुसूचित जाति तथा जनजाति के लिए 50 प्रतिशत) अंकों के साथ किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर एवं भाषाविज्ञान/ अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान/ भाषा-प्रौद्योगिकी/ अनुवाद-प्रौद्योगिकी/ कंप्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स में एम. फिल. परीक्षा उत्तीर्ण ।
वांछनीय : योग्यता (क) में निर्दिष्ट विषयों में एम. फिल/जे. आर. एफ./नेट/अन्य राष्ट्रीय स्तर परीक्षा उत्तीर्ण।
विभागीय प्रयोगशाला:
इस विभाग में सैध्दांतिक एवं अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान संबंधी विभिन्न क्षेत्रों में अध्ययन/अध्यापन कार्य को दृष्टि में रखते हुए एक सुव्यवस्थित एवं अद्यतन प्रयोगशाला का निर्माण किया गया है, जिसमें शोधार्थी/विद्यार्थी अपना शोध/परियोजना कार्य संपन्न करते हैं और आवश्यकतानुसार प्रबंध-लेखन का कार्य भी करते हैं ।
प्रस्तावना
हिंदी भाषा को कंप्यूटर के साथ जोड़ते हुए अन्य प्रौद्योगिकी एवं गैर-प्रौद्योगिकी संस्थाओं की मांग के अनुसार इस विषय पर गंभीर अध्ययन व शोध के साथ-साथ विषय के प्रति प्रतिबध्दता पैदा करने के उद्देश्य से यह विभाग स्थापित किया गया है। इस विभाग के अंतर्गत निम्नलिखित पाठ्यक्रमों का संचालन हो रहा है।
पाठ्यक्रम :
- एम. ए. (कंप्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स)
यह दो वर्षीय नियमित पाठ्यक्रम है, जिसके अंतर्गत कंप्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स के सैध्दान्तिक एवं अनुप्रयुक्त क्षेत्रों यथा- कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भाषा, प्राकृतिक भाषा संसाधन, प्राकृतिक भाषा समझ आदि का अध्ययन किया जाता है।
64 क्रेडिट का यह पाठ्यक्रम चार छमाहियों में पूर्ण होता है। इसके साथ ही कंप्यूटर का अध्ययन अनिवार्य है, जो प्रत्येक छमाही में 2 क्रेडिट का होता है।
योग्यता : किसी भी अनुशासन में न्यूनतम 40 प्रतिशत (अनुसूचित जाति तथा जनजाति के लिए 35 प्रतिशत) अंकों के साथ किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (10+2+3 पाठ्यक्रम) परीक्षा उत्तीर्ण ।
- पी-एच. डी. (कंप्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स)
यह पाठ्यक्रम विद्या-परिषद द्वारा अनुमोदित है, जिसका संचालन भविष्य में होगा ।
विभागीय प्रयोगशाला:
कंप्यूटेशनल भाषाविज्ञान संबंधी आवश्यकता को दृष्टि में रखते हुए एक सुव्यवस्थित एवं अद्यतन प्रयोगशाला का निर्माण किया गया है, जिसमें इस विभाग के शोधार्थी/विद्यार्थी अपने शोध/परियोजना कार्य के संपादनोपरांत प्रबंध-लेखन का कार्य भी करते हैं ।
प्रस्तावना
प्रौद्योगिकी अध्ययन केन्द्र (भाषा-प्रौद्योगिकी, अनुवाद-प्रौद्योगिकी, सूचना-प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला) विश्व स्तरीय उच्च मानकता के साथ कंप्यूटर विज्ञान, सूचना-प्रौद्योगिकी एवं इनके अनुप्रयुक्त क्षेत्र में प्रशिक्षण देने तथा गहन शोध-कार्य करने के उद्देश्य से अपनी अत्याधुनिक प्रयोगशाला द्वारा भाषा-प्रौद्योगिकी, भाषा-अभियांत्रिकी अनुवाद-प्रौद्योगिकी और सूचना-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शोध एवं विकास के अन्तरराष्ट्रीय मानक के साथ हिंदी को अन्तरराष्ट्रीय भाषा के रूप में स्थापित करने के लिए समर्पित है । इस केन्द्र की प्राथमिकता विश्वविद्यालय में प्रौद्योगिकी के राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय विकास से संबंधित शिक्षा के अन्य अनुशासनों की मदद करना तथा ई-कैम्पस एवं ई-कल्चर को बढ़ावा देना भी है। इस केन्द्र में निम्नलिखित स्नातकोत्तर एवं शोधस्तरीय तथा सर्टिफिकेट एवं डिप्लोमास्तरीय पाठ्यक्रम चलाए जाते है।
पाठ्यक्रम :
(क) स्नातकोत्तर एवं शोधस्तरीय पाठ्यक्रम
- एम. आई. एल. ई. (मास्टर ऑफ इंफॉरमेटिक्स एण्ड लैंग्वेज इंजीनियरिंग)
इस पाठ्यक्रम के अंतर्गत भाषा से जुड़े सूचना एवं अभियांत्रिकी क्षेत्र का अध्ययन किया जाता है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में हिंदी भाषा को लेकर नई अवधारणा का विकास करना है। इस पाठ्यक्रम में भाषा-अभियांत्रिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी से संबध्द विविध प्रयोगात्मक क्षेत्रों के अध्ययन पर बल दिया जाता है। 64 क्रेडिट का यह पाठ्यक्रम चार छमाहियों में पूर्ण होता है। इसके साथ ही कंप्यूटर का अध्ययन अनिवार्य है, जो प्रत्येक छमाही में 2 क्रेडिट का होता है।
योग्यता : योग्यता : (क) किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कंप्यूटर विज्ञान या सूचना-प्रौद्योगिकी में न्यूनतम 40 प्रतिशत (अनुसूचित जाति तथा जनजाति के लिए 35 प्रतिशत) अंकों के साथ स्नातक (10+2+3 पाठ्यक्रम) उत्तीर्ण । हिंदी भाषा का ज्ञान अनिवार्य…
अथवा
(ख) योग्यता (क) में निर्दिष्ट अनुशासन को छोड़कर अन्य किसी भी अनुशासन में किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से न्यूनतम 40 प्रतिशत (अनुसूचित जाति तथा जनजाति के लिए 35 प्रतिशत) अंकों के साथ स्नातक (10+2+3 पाठ्यक्रम) उत्तीर्ण एवं कंप्यूटर एप्लिकेशन/सूचना-प्रौद्योगिकी में डिप्लोमा ।
- पी-एच. डी. (इंफॉरमेटिक्स एण्ड लैंग्वेज इंजीनियरिंग)
यह पाठ्यक्रम सूचना-प्रौद्योगिकी एवं भाषा-अभियांत्रिकी से संबध्द क्षेत्रों में अधुनातन शोध को प्रोत्साहित करने एवं नई अवधारणाओं का विकास करने हेतु प्रारम्भ किया गया है।
योग्यता :(क) प्रोग्रामिंग भाषा की जानकारी के साथ किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कंप्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स /भाषा-प्रौद्योगिकी/अनुवाद-प्रौद्योगिकी में एम.ए. न्यूनतम 55 प्रतिशत (अनुसूचित जाति तथा जनजाति के लिए 50 प्रतिशत) अंकों के साथ उत्तीर्ण ।
अथवा
(ख) किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से भाषाविज्ञान/अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान में एम.ए. न्यूनतम 55 प्रतिशत (अनुसूचित जाति तथा जनजाति के लिए 50 प्रतिशत) अंकों के साथ उत्तीर्ण एवं कंप्यूटर विज्ञान/ सूचना-प्रौद्योगिकी में डिग्री/डिप्लोमा
अथवा
(ग) किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कंप्यूटर विज्ञान/ सूचना-प्रौद्योगिकी में एम.टेक., एम.सी.ए. एवं एम.एस-सी. अथवा एम. आई. एल. ई. न्यूनतम 55 प्रतिशत (अनुसूचित जाति तथा जनजाति के लिए 50 प्रतिशत) अंकों के साथ उत्तीर्ण
वांछनीय : उपर्युक्त निर्दिष्ट विषयों में एम. फिल/जे. आर. एफ./नेट/अन्य राष्ट्रीय स्तर परीक्षा उत्तीर्ण।
पाठ्यक्रम :
(ख) सर्टिफिकेट/डिप्लोमा स्तरीय पाठ्यक्रम
इस केन्द्र द्वारा कम्प्यूटर के क्षेत्र में निम्नलिखित सर्टिफिकेट/डिप्लोमा स्तरीय अंशकालिक पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से कम्प्यूटर के संरचनात्मक एवं संचलनात्मक पक्षों को गहन रूप से पढ़ाया जाता है। ये पाठ्यक्रम कम्प्यूटर अथवा सूचना प्रौद्योगिकी जैसे विषय में अध्ययन न किए हुए विद्यार्थियों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है।
- सर्टिफिकेट इन कम्प्यूटर एप्लिकेशन (सी.सी.ए.)
यह एक अंशकालिक छमाही पाठ्यक्रम है, जो 16 क्रेडिट का होता है जिसमें 4-4 क्रेडिट के तीन प्रश्न-पत्र एवं 4 क्रेडिट का एक परियोजना-कार्य होता है ।
योग्यता : किसी भी अनुशासन में 10 + 2 उत्तीर्ण
- डी.सी.ए. (डिप्लोमा इन कम्प्यूटर एप्लिकेशन)
यह एक वर्षीय अंशकालिक पाठ्यक्रम है, जो दो छमाही में पूर्ण होता है। 32 क्रेडिट के इस पाठ्यक्रम के प्रथम छमाही (सी.सी.ए.) में 16 क्रेडिट एवं द्वितीय छमाही में 16 क्रेडिट होता है, जिसमें 4-4 क्रेडिट के दो प्रश्न-पत्र एवं 8 क्रेडिट का एक परियोजना-कार्य होता है ।
योग्यता : (डी.सी.ए. के लिए) सी.सी.ए. उत्तीर्ण होना अनिवार्य ।
पाठ्यक्रम :
(ग) आंतरिक पाठ्यक्रम
उच्च शिक्षा में पठन-पाठन एवं शोधकार्य के लिए कम्प्यूटर शिक्षा की अनिवार्यता को देखते हुए, विश्वविद्यालय द्वारा एम. ए., एम. फिल. एवं पी-एच. डी. के विद्यार्थियों/शोधार्थियों के लिए उनके मूल विषयों के साथ निम्नलिखित अनिवार्य पाठ्यक्रम लीला (Laboratory in Informatics for the Liberal Arts) के माध्यम से चलाए जाते हैं |
- एम. ए. के विद्यार्थियों हेतु
विश्वविद्यालय के सभी संकाय के एम. ए. स्तरीय विद्यार्थियों के लिए Computer Fundamental and Applications (दो वर्षीय) नामक सर्टिफिकेट स्तरीय अनिवार्य पाठ्यक्रम चलाया जाता है, जिसमें विद्यार्थियों को उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। इस पाठ्यक्रम के द्वारा विद्यार्थियों को कम्प्यूटर संचालन एवं अनुप्रयोग संबंधी ज्ञान सहज एवं सघन रूप से दिया जाता है।
- एम. फिल. एवं पी-एच. डी. के शोधार्थियों हेतु
विश्वविद्यालय के सभी संकाय के एम. फिल. एवं पी-एच. डी. स्तरीय शोधार्थियों, जो किसी भी मान्यता प्राप्त संस्था से कोई सर्टिफिकेट/डिप्लोमा आदि प्राप्त न किए हो, के लिए कम्प्यूटर संचालन एवं अनुप्रयोग (Computer Operation and Applications) (एक सत्रीय पाठ्यक्रम) नामक अनिवार्य पाठ्यक्रम चलाया जाता है, जिसमें शोधार्थियों को उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। इस पाठ्यक्रम के माध्यम से शोधार्थियों को कम्प्यूटर संचालन का विशेष ज्ञानार्जन कराया जाता है, जो उनके शोध की गुणवत्ता में सहायक होता है।
योग्यता : (डी.सी.ए. के लिए) सी.सी.ए. उत्तीर्ण होना अनिवार्य ।
प्रयोगशाला:
विश्वविद्यालय के अकादमिक और अनुप्रयोगात्मक आवश्यकताओं को देखते हुए निम्नलिखित प्रयोगशालाओं की स्थापना की गयी है, जो प्रौद्योगिकी अध्ययन केंद्र के अभिन्न अंग हैं ।
- लीला (Laboratory in Informatics for the Liberal Arts) : विश्वविद्यालय में ई-कल्चर का निर्माण करना इस प्रयोगशाला का मुख्य उद्देश्य है, जिसके परिपूर्ति हेतु इस प्रयोगशाला के अंतर्गत निम्नलिखित प्रकोष्ठों का संचालन संयुक्त रूप से किया जाता है।
- अकादमी एवं शोध : विश्वविद्यालय के सभी संकाय के एम. ए. स्तरीय विद्यार्थियों के लिए Computer Fundamental and Applications (दो वर्षीय) नामक सर्टिफिकेट तथा एम. फिल. एवं पी-एच. डी. स्तरीय शोधार्थियों, जो किसी भी मान्यता प्राप्त संस्था से कोई सर्टिफिकेट/डिप्लोमा आदि प्राप्त न किए हों, के लिए कम्प्यूटर संचालन एवं अनुप्रयोग (Computer Operation and Applications) (एक सत्रीय पाठ्यक्रम) नामक अनिवार्य पाठ्यक्रमों का संचालन करता है। इन पाठ्यक्रमों के द्वारा विद्यार्थियों/शोधार्थियों को कम्प्यूटर संचालन एवं अनुप्रयोग संबंधी ज्ञान सहज एवं सघन रूप से दिया जाता है।
- आई टी सर्विस : विश्वविद्यालय में सूचना प्रौद्योगिकी के विकास संबंधी अनुप्रयोगों एवं सेवाओं जैसी सभी आवश्यकताओं की परिपूर्ति करना इस प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित अनुप्रयोगों का विकास-कार्य निष्पादित किए जा रहे हैं -
- अवकाश विवरण 1.0 : विश्वविद्यालय के स्थापना विभाग के लिए सभी कर्मचारियों, अधिकारियों एवं शिक्षकों के अवकाश संबंधी विवरणों की सूचना की गणना, रिपोर्ट-जनरेशन एवं संचयन हेतु इस सॉफ्टवेयर का विकास किया गया है।
- वेतन पंजिका 1.0 : विश्वविद्यालय के वित्त विभाग के लेखा-अनुभाग के लिए कर्मचारियों, अधिकारियों एवं शिक्षकों के वेतन संबंधी विवरणों की सूचना (जीपीएफ, एनसीपीएफ, एलआईसी, पे-बिल रजिस्टर, एडवांस, रिकवरी, इनकम टैक्स आदि) की गणना कर पे-स्लिप तथा रिपोर्ट तैयार करना एवं संचयन हेतु इस सॉफ्टवेयर का विकास किया गया है।
उपर्युक्त सॉफ्टवेयरों के सफल विकास के उपरांत निम्नलिखित ई-कार्य भी संपन्न किए जा रहे है-
- विश्वविद्यालय की वेब-साइट का अद्यतन
- विश्वविद्यालय में ऑन-लाइन प्रवेश हेतु प्रवेश प्रबंधन प्रणाली नामक इंटरनेट आधारित सॉफ्टवेयर का विकास
- वाई-फाई नेटवर्किंग की सुविधा
- वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की स्थापना
- लीला हेल्प-डेस्क : विश्वविद्यालय के समस्त कम्प्यूटरों एवं नेटवर्किंग को अद्यतन रखने तथा उनके रख-रखाव की जिम्मेदारी इस प्रकोष्ठ की है।
- भाषा-प्रयोगशाला: विश्वविद्यालय सूचना-क्रांति के इस युग में हिंदी को विश्व फलक पर स्थापित करने के लिए कटिबध्द है, जिसके लिए यहाँ पर कई महत्त्वपूर्ण भाषिक इंजीनियरिंग एवं अनुप्रयोग के क्षेत्रों में शोध एवं विकास कार्य इस प्रयोगशाला में चल रहे हैं। इस प्रयोगशाला के अंतर्गत निम्नलिखित सॉफ्टवेयरों का विकास किया जा चुका है ।
- समसामायिक हिंदी प्रयोग कोश (वेब संस्करण) नामक शब्दकोश का विकास किया गया है, जिसके अंतर्गत कुल 5000 कोशगत प्रविष्टियाँ हैं। इन प्रविष्टियों के साथ व्याकरणिक कोटि, पर्यायवाची, संदर्भगत प्रयोग आदि कोशीय सूचनाएं दी गई हैं।
- विश्वविद्यालय में चल रहे हिंदी सूचना विश्वकोश परियोजना के लिए अंतर्वस्तु प्रबंधक 1.0 नामक सॉफ्टवेयर का विकास किया गया है, जिसके माध्यम से विश्वकोश के अंतर्वस्तु का विश्लेषण आसानी से किया जा सकता है। इसमें शब्दावृत्ति की गणना, विषय-संगठन, दस्तावेज़ प्रबंधन आदि सुविधाएँ दी गयी है।
उपर्युक्त सॉफ्टवेयरों के सफल विकास के उपरांत निम्नलिखित प्राकृत भाषा संसाधन एवं समझ संबंधी अनुप्रयोगों पर भी शोध एवं विकास कार्य चल रहा है-
- हिंदी थिसॉरस तथा कोश संपदा का विकास
- अनुक्रमिक व्याकरण रूपवाद (Sequential Grammar Formalism) पर आधारित मनु नामक अग्रेजी-हिंदी मशीनी अनुवाद प्रणाली का विकास
- वाक्-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भाषिक ज्ञान आधारित ई-लेखक नामक वाक्-से-पाठ और ई-पाठक नामक पाठ-से-वाक् प्रणाली पर शोध
- ई-टैग (EnglishTAGger) नामक अग्रेजी टैगर तथा पदविक (पद-विच्छेदक) नामक हिंदी टैगर का विकास
- कॉर्पस (Corpus) एवं ज्ञान सम्पदा (Knowledge Repository) का विकास
- रूप-वैज्ञानिक नियमों पर आधारित रूप-विश्लेषक तथा रूप-संश्लेषक का विकास
प्रस्तावना
यह केन्द्र भारतीय एवं विदेशी भाषाओं तथा पारंपरिक संस्कृति की शिक्षा के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय परिदृश्य के अनुरूप भारतीयों तथा विदेशियों को शिक्षा देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है । इस केन्द्र के अंतर्गत निम्नलिखित पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं -
पाठ्यक्रम :
(क) भारतीय भाषाओं के लिए संचालित पाठ्यक्रम
हिंदी को विविध भारतीय भाषाओं के समन्वय से अंतरराष्ट्रीय पटल पर सुस्थापित करने तथा इनके माध्यम से विभिन्न राष्ट्रों/राज्यों के साथ सामाजिक - सांस्कृतिक संबंध स्थापित करने व रोजगार के अवसर उत्पन्न करने हेतु निम्नलिखित भारतीय भाषाओं के विविध पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
- विश्वभाषा हिंदी (डिप्लोमा/ओरिएण्टेशन/ग्रीष्मकालीन पाठ्यक्रम)
विश्वभाषा हिंदी (डिप्लोमा/ओरिएण्टेशन/ग्रीष्मकालीन पाठ्यक्रम)
इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य विदेशियों के लिए हिंदी के संप्रेषणात्मक एवं प्रयोजनमूलक साहित्यिक तथा सांस्कृतिक घटकों की जानकारी प्रदान करना है । ये पाठ्यक्रम 6-12 माह के हैं ।
- संस्कृत में डिप्लोमा
इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य संस्कृत भाषा व साहित्य की सैध्दांतिक एवं व्यवहारिक आधारभूत जानकारी देना है। पाठ्यक्रम सामग्री में प्राथमिक जानकारी से लेकर संभाषण तक को शामिल किया गया है। यह एक वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम है।
योग्यता :किसी भी विषय में 10+2 परीक्षा उत्तीर्ण ।
टिप्पणी :मराठी, तमिल, बंगला, तेलुगु, गुजराती, कन्नड़, असमी, पंजाबी, मलयालम, संस्कृत और उर्दू जैसी भारतीय भाषाओं में विभिन्न पाठ्यक्रमों (डिप्लोमा/स्नातकोत्तर/शोध) के संचालन हेतु विद्या-परिषद् द्वारा अनुमोदन प्राप्त।
पाठ्यक्रम :
(ख) विदेशी भाषाओं के लिए संचालित पाठ्यक्रम -
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पारस्परिक संबंधों को सुदृढ़ करने तथा विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर की उपलब्धता को दृष्टि में रखते हुए विदेशी भाषा में निम्नलिखित इंटीग्रेटेड पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
- चीनी में सर्टिफिकेट/डिप्लोमा/एडवांस्ड डिप्लोमा
- स्पेनिश में सर्टिफिकेट/डिप्लोमा/एडवांस्ड डिप्लोमा
- फ्रेंच में सर्टिफिकेट/डिप्लोमा/एडवांस्ड डिप्लोमा
उपर्युक्त सभी विदेशी पाठ्यक्रमों में सांस्कृतिक, सामाजिक तथा भाषिक पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे शिक्षार्थी संबंधित देश से परिचित हो सके और भाषिक संप्रेषण स्थापित कर सके। इन सभी पाठ्यक्रमों के लिए पाठ्यक्रम अवधि एवं न्यूनतम योग्यता निम्नानुसार हैं ।
पाठ्यक्रम |
न्यूनतम योग्यता |
पाठ्यक्रम अवधि |
| सर्टिफिकेट |
10+2 |
प्रथम छमाही |
| डिप्लोमा |
संबध्द विषय में सर्टिफिकेट |
द्वितीय छमाही |
| डिप्लोमा |
संबध्द विषय में डिप्लोमा |
तृतीय एवं चतुर्थ छमाही |
टिप्पणी : चीनी, स्पेनिश, फ्रेंच, जापानी, अरबी, फारसी, जर्मन, कोरियाई, रूसी और पारसी जैसी विदेशीय भाषाओं में विभिन्न पाठ्यक्रमों (सर्टिफिकेट/डिप्लोमा/एडवांस्ड डिप्लोमा/स्नातकोत्तर/शोध) के संचालन हेतु विद्या-परिषद द्वारा अनुमोदन प्राप्त।
विभागीय प्रयोगशाला
इस केन्द्र में संचालित भारतीय एवं विदेशी भाषाओं के अध्ययन/अध्यापन कार्य को दृष्टि में रखते हुए एक सुव्यवस्थित एवं अद्यतन फोनेटिक प्रयोगशाला का निर्माण किया गया है, जिससे शिक्षार्थी संबंधित भाषा में भाषिक कौशल का विकास करते हैं ।
हिंदी सूचना-प्रौद्योगिकी संघ
हिंदी को अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में स्थापित करने के लक्ष्य प्राप्ति हेतु International Association of Hindi Information Technology नामक एक अंतरराष्ट्रीय संघ की स्थापना के लिए चल रही प्रक्रिया को पूर्ण करके हिंदी के सैध्दान्तिक, अनुप्रयोगात्मक एवं अभियांत्रिकी पक्ष को सघन विकासोन्मुख बनाना है।
मंथन-मंच
भाषा-विद्यापीठ में प्रत्येक माह भाषाविज्ञान के सैध्दान्तिक एवं अनुप्रयुक्त क्षेत्र तथा प्राकृतिक भाषा संसाधन आधारित अनुप्रयोग आदि जैसे विषयों में मौलिक विचार-विमर्श हेतु मंथन-मंच का आयोजन होता है, जिसमें अभी तक विद्यापीठ के विद्यार्थी एवं शिक्षक ही भाग लेते हैं, किन्तु भविष्य में इसे विषय तथा सहभागिता की दृष्टि से और भी व्यापक बनाना है।
पत्रिकाओं का प्रकाशन
विद्या-परिषद् की तीसरी बैठक में माननीय सदस्यों द्वारा भारतीय भाषा प्रौद्योगिकी नामक पत्रिका के प्रकाशित किये जाने के संदर्भ में लिए गए निर्णय के अनुसार भविष्य में इस पत्रिका को प्रकाशित किया जाएगा।
भाषा-विद्यापीठ के छात्रों द्वारा भाषाविज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे विषयों में मौलिक लेखन को प्रोत्साहन देने हेतु प्रयास नामक भित्ति पत्रिका का प्रकाशन किया जाता है, जिसे विषय और स्वरूप की दृष्टि से राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर की पत्रिका बनाना है।
अकादमिक गतिविधियाँ
क्र. सं.
|
पाठ्यक्रम का नाम |
तिथि |
| 1. |
एम.आई.एल.ई. (मास्टर ऑफ इंफॉरमेटिक्स एण्ड लैंग्वेज इंजीनियरिंग) पी-एच. डी. (इंफॉरमेटिक्स एण्ड लैंग्वेज इंजीनियरिंग) |
7-8 मार्च, 2009 |
| 2. |
एम. ए. (कम्प्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स) पी-एच. डी. (कम्प्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स) |
29-30 मार्च, 2009 |
| 3. |
डिप्लोमा (तमिल) एम. ए. (तमिल) |
प्रस्तावित प्रस्तावित |
| 4. |
सर्टिफिकेट (स्पेनिश) डिप्लोमा (स्पेनिश) एडवांस्ड डिप्लोमा (स्पेनिश) एम. ए. (स्पेनिश) |
प्रस्तावित |
| 5. |
डिप्लोमा (मराठी) एम. ए. (मराठी) |
प्रस्तावित |
| 6. |
सर्टिफिकेट (चीनी) डिप्लोमा (चीनी) एडवांस्ड डिप्लोमा (चीनी)
एम. ए. (चीनी) |
प्रस्तावित |
| 7. |
डिप्लोमा (उर्दू) |
20-21 अप्रैल, 2009 |
| 8. |
सर्टिफिकेट (फ्रेंच) डिप्लोमा (फ्रेंच) एडवांस्ड डिप्लोमा (फ्रेंच) |
22-23 अप्रैल, 2009 |
संगोष्ठी
संकाय-शोधार्थी
2.साहित्य विद्यापीठ

विश्वविद्यालय अधिनियम के अंतर्गत मान्य चार विद्यापीठों में से साहित्य विद्यापीठ एक प्रमुख विद्यापीठ है। साहित्य का भारतीय तथा विश्व भाषाओं के साहित्य के साथ संवाद और तुलनात्मक अधययन एवं शोध इस विद्यापीठ का प्रधान लक्ष्य है।
विद्यापीठ की मूल संकल्पना देश-दुनिया के भाषायी एवं साहित्यिक वैविध्य के पीछे सक्रिय समान मानवीय मस्तिष्क और उसकी सृजनशीलता में साम्य की धारणा पर अवलम्बित है। भाषा और साहित्य अनेक और बहुविधा हैं, किन्तु उनका सर्जक मानस और आस्वादक चिह्न, अपने संस्कारों के भेद के बावजूद, बुनियादी प्रकृति में एक-सा है। इस कारण विभिन्न भाषाओं के साहित्य के बीच संवाद की अपार सम्भावनाएँ हैं। इन सम्भावनाओं का सन्धान और शोध विद्यापीठ की वरीय प्राथमिकता है। इससे अकादमिक उद्देश्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय भावात्मक एकता तथा मानवीय सह-भाव भी सम्पुष्ट होता है।
साहित्य सर्व समावेशी विद्या है। ज्ञान के विभिन्न अनुशासनों और कलाओं के साथ उसका घनिष्ठ एवं प्रगाढ़ सम्बन्ध परम्परा से ही सर्वविदित है। इधर विकसित नयी प्रौद्योगिकी और तज्जनित विभिन्न माध्यमों से भी साहित्य का अपरिहार्य सम्बन्ध विकसित हुआ है। इस दृष्टि से अंतरानुशासनिक अध्ययन एवं शोध भी साहित्य विद्यापीठ की प्रतिश्रुति है।
फिलहाल, साहित्य विद्यापीठ के अंतर्गत साहित्य विभाग में (तुलनात्मक साहित्य) के एम.ए., एम.फिल. एवं पी-एच.डी. पाठ्यक्रम संचालित हैं। इसके अलावा विदेशी विद्यार्थियों के लिए भाषा, साहित्य एवं संस्कृति का बी.ए. पाठ्यक्रम, तुलनात्मक भारतीय साहित्य और हिन्दुस्तानी में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रस्तावित हैं।
-
साहित्य विभाग
2.4. स्नातकोत्तर डिप्लोमा : तुलनात्मक भारतीय साहित्य
यह एक वर्ष का पाठ्यक्रम है जो दो छमाहियों में पूरा होगा। पहली छमाही में चार प्रश्न पत्र होंगे और दूसरी छमाही में भी चार प्रश्न पत्र होंगे। दूसरी छमाही में दो प्रश्न पत्रों के साथ परियोजना-कार्य और मौखिकी भी पाठ्यचर्या का अंग होगी। सम्पूर्ण पाठ्यक्रम 32 क्रेडिट का होगा। इस सत्र में प्रवेश हेतु कुल 10 सीटें होंगी।
योग्यता एवं प्रवेश : 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक/स्नातकोत्तर परीक्षा उत्तीर्ण ;अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए 45 प्रतिशत अंक। साहित्य, कला और मानविकी अनुशासनों से सम्बध्द अभ्यर्थियों को वरीयता। इस पाठ्यक्रम में प्रवेश एम.फिल./पी-एच.डी. पाठ्यक्रम के साथ भी लिया जा सकता है। प्रवेश सीधे मेरिट और साक्षात्कार पर आधारित।
शुल्क : रु.1645/-(विस्तृत विवरण हेतु विवरणिका देखें)
हिंदी
2.5. स्नातकोत्तर डिप्लोमा : हिंदुस्तानी
योग्यता एवं प्रवेश : किसी भी अनुशासन में 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक/स्नातकोत्तर परीक्षा उत्तीर्ण ;अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए 45 प्रतिशत अंक। इस पाठ्यक्रम में प्रवेश एम.फिल./पी-एच.डी. पाठ्यक्रम के साथ भी लिया जा सकता है। प्रवेश सीधे मेरिट और साक्षात्कार पर आधारित।
शुल्क : रु.1500/- (विस्तृत विवरण हेतु विवरणिका देखें)
नाट्यकला एवं फिल्म अध्ययन विभाग
विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेश शर्मा
एसोसिएट प्रोफेसरडा. ओमप्रकाश भारती
सहायक प्रोफेसर – डा. सतीश पावड़े
सहायक प्रोफेसर - डा. विधु खरे
पाठ्यक्रम
एम.ए. नाट्यकला एवं फिल्म अध्ययन
यह दो वर्षीय पाठ्यक्रम है जो चार छमाहियों में पूरा होता है। चार छमाहियों का यह नियमित पाठ्यक्रम 64 क्रेडिट का है। इसके साथ ही कम्प्यूटर का अध्ययन अनिवार्य है जो प्रत्येक छमाही में 2 क्रेडिट का है। इस पाठ्यक्रम में इस सत्र में कुल 28 सीटें हैं।
योग्यता : किसी भी अनुशासन में न्यूनतम 40 प्रतिशत अंकों के साथ किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (10+2+3 पाठ्यक्रम) परीक्षा उत्तीर्ण। (अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए 35 प्रतिशत)
प्रवेश प्रक्रिया में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली अथवा भारतेन्दु नाट्य अकादमी जैसे राष्ट्रीय महत्व के अथवा फिल्म संस्थानों से डिप्लोमा प्राप्त अभ्यर्थी बिना लिखित परीक्षा के सीधे साक्षात्कार के लिए बुलाए जाएँगे।
शुल्क : 3845/- (विस्तृत विवरण हेतु विवरणिका देखें)
एम.फिल. नाट्यकला एवं फिल्म अध्ययन
यह एक वर्ष का पाठ्यक्रम है जो दो छमाहियों में पूरा होता है। पहली छमाही में तीन प्रश्न-पत्र होंगे। दूसरी छमाही में एक लघुशोध प्रबन्ध प्रस्तुत करना होगा और एक मौखिक परीक्षा भी ली जाएगी। पूरा पाठ्यक्रम 22 क्रेडिट का है। पहली छमाही में तीन प्रश्न-पत्र 12 क्रेडिट के होंगे और दूसरी छमाही में लघु शोध-प्रबंध 8 क्रेडिट और मौखिक परीक्षा 2 क्रेडिट की होगी। इस पाठ्यक्रम में इस सत्र में कुल 10 सीटें हैं।
योग्यता :सम्बध्द अनुशासन में किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर परीक्षा उत्तीर्ण। (अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लिए 50 प्रतिशत)
शुल्क : 3845/- (विस्तृत विवरण हेतु विवरणिका देखें)
संस्कृति विद्यापीठ

- मगांअहिवि का संस्कृति विद्यापीठ संस्कृति अध्ययन एवं अन्य समाज विज्ञान विमर्शों को समाहित करते हुए बहुसांस्कृतिक अकादमिक विकास के अगुआ के रूप में कार्य करने के लक्ष्य को सम्मुख रखता है।
- ऐसा प्रयास करते हुए विद्यापीठ महात्मा गांधी के दृष्टिकोण में अन्तर्निहित सीखने के बहुल तरीकों की प्रतिबध्दता और असीम विस्तार से निर्देशित होता है। गांधी दृष्टि विश्वविद्यालय की भूमिका को निश्चित करने में तथा क्रियान्वित होने कार्यक्रमों में प्रतिबध्दता बनाए रखने में महत्वपूर्ण है।
- गांधी दृष्टि के साथ विद्यापीठ में सम्पन्न अकादमिक,शोध एवं अन्य गतिविधियां समानता, सातत्य एवं समस्त मानवता के शांतिपूर्ण विकास के मूल्यों का मार्ग प्रशस्त करती हैं।
- विद्यापीठ का सशक्त प्रयास होगा कि वह स्त्री-अध्ययन,दलित एवं जनजाति अध्ययन जैसे विषयों के जरिए वंचित तबकों की आवाज को मुखर करते हुए उन्हें अकादमिक जगत में बहस का मुख्य मुद्दा बनाए। आज के यर्थाथ एवं अपनी समझ को गहरा करते हुए मूलवासियों एवं आदिवासियों की जीवन दृष्टि को, दलित एवं अन्य दमित वर्गों के सामाजिक न्याय को प्राप्त करने के संघर्ष को तथा स्त्रियों द्वारा बराबरी का स्थान हासिल करने के संघर्ष को सामने लाना इस विद्यापीठ की समग्र दृष्टि एवं कार्यक्रमों का अभिन्न हिस्सा है।
इस विद्यापीठ के अंतर्गत ज्ञान के प्रचलित अनुशासनों यथा-मानविकी व समाज विज्ञान से जुड़े अंतर-अनुशासनात्मक विषय के रूप में निम्नलिखित विभागों में निम्नांकित पाठ्यक्रम चल रहे हैं
अहिंसा एवं शांति अध्ययन केन्द्र
- पाठ्यक्रम
- 1. एम.ए. अहिंसा एवं शांति अध्ययन
विश्वविद्यालय में वैश्विक स्तर पर बढ़ती जा रही हिंसात्मक मनोवृत्ति को दृष्टि में रखकर गांधीवादी मूल्यों के संवर्द्धन एवं संरक्षण के उद्देश्य से एम.ए. अहिंसा एवं शांति अध्ययन में दो वर्षीय पाठ्यक्रम चलाया जा रहा है। यह पाठ्यक्रम चार छमाहियों में पूरा होता है। यह पाठ्यक्रम 64 क्रेडिट का है। इसके साथ ही कम्प्यूटर का अध्ययन अनिवार्य है जो प्रत्येक छमाही में 2 क्रेडिट का है। इस पाठ्यक्रम में कुल 28 सीटें हैं।
योग्यता :
किसी भी अनुशासन में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (10+2+3 पाठ्यक्रम) परीक्षा उत्तीर्ण। (अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए 45 प्रतिशत)
शुल्क
- प्रवेश शुल्क : रु. 150.00
- छमाही शिक्षण शुल्क : रु. 500.00
- सुरक्षा शुल्क (प्रत्यर्पणीय) : रु. 250.00
- पुस्तकालय/प्रयोगशाला संरक्षण शुल्क : रु. 200.00
- पुस्तकालय शुल्क (वार्षिक) : रु. 50.00
- खेलकूद शुल्क (वार्षिक) : रु. 50.00
- परिचय पत्र शुल्क : रु. 20.00
- सांस्कृतिक कार्यक्रम शुल्क : रु. 25.00
- इंटरनेट शुल्क (वार्षिक) : रु. 200.00
- चिकित्सा शुल्क (वार्षिक) : रु. 50.00
- अकादमिक/परियोजना भ्रमण : रु. 110.00
- कुल : रु. 1605.00
- 2. एम.फिल. अहिंसा एवं शांति अध्ययन
अहिंसा सम्बन्धी मूल्यों एवं सिद्धान्तों के प्रति गंभीर अध्ययन व शोध के साथ-साथ मानवता के लिए प्रतिबद्धता पैदा करने के उद्देश्य से यह पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है। यह पाठ्यक्रम एक वर्ष का है जो दो छमाहियों में पूरा होता है। पहली छमाही में तीन प्रश्न-पत्र होंगे। दूसरी छमाही में एक लघुशोध प्रबंध प्रस्तुत करना होगा और एक मौखिक परीक्षा भी ली जाएगी। पूरा पाठ्यक्रम 22 क्रेडिट का है। पहली छमाही में तीन प्रश्न-पत्र-12 क्रेडिट के होंगे और दूसरी छमाही में लघु शोधप्रबंध 8 क्रेडिट का और मौखिक परीक्षा 2 क्रेडिट की होगी। इस पाठ्यक्रम में कुल 14 सीटें हैं।
योग्यता :
सम्बद्ध अनुशासन मानविकी या समाज विज्ञान की किसी भी विधा में किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर परीक्षा उत्तीर्ण। (अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लिए 50 प्रतिशत)
शुल्क
- प्रवेश शुल्क : रु. 150.00
- छमाही शिक्षण शुल्क : रु. 500.00
- सुरक्षा शुल्क (प्रत्यर्पणीय) : रु. 250.00
- पुस्तकालय/प्रयोगशाला संरक्षण शुल्क : रु. 200.00
- पुस्तकालय शुल्क (वार्षिक) : रु. 50.00
- खेलकूद शुल्क (वार्षिक) : रु. 125.00
- परिचय पत्र शुल्क : रु. 20.00
- सांस्कृतिक कार्यक्रम शुल्क : रु. 25.00
- इंटरनेट शुल्क (वार्षिक) : रु. 200.00
- चिकित्सा शुल्क (वार्षिक) : रु. 50.00
- अकादमिक/परियोजना भ्रमण : रु. 300.00
- कुल : रु. 1870.00
- 3. पी-एच.डी. अहिंसा एवं शांति अध्ययन
पी-एच.डी. अहिंसा एवं शांति अध्ययन
अहिंसा एवं शांति अध्ययन के अंतर्गत पी-एच.डी. पाठ्यक्रम चल रहा है।
योग्यता :
सम्बद्ध अनुशासन में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों के साथ किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर परीक्षा उत्तीर्ण। (अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लिए 50 प्रतिशत)
वांछनीय :
सम्बद्ध अनुशासन में एम.फिल./जे.आर.एफ./नेट/अन्य राष्ट्रीय परीक्षा।
शुल्क
- पंजीकरण शुल्क : रु. 300.00 (केवल प्रवेश के समय)
- कम्प्यूटर शुल्क : रु. 1000.00 (प्रति वर्ष)
- पुस्तकालय शुल्क : रु. 300.00 (प्रति वर्ष)
- प्रतिभूति राशि : रु. 1000.00 (प्रतिदेय)
- परीक्षा शुल्क : रु. 1000.00 (शोध प्रस्तुति के समय)
- चिकित्सा शुल्क : रु. 50.00 (वार्षिक)
- कुल : रु. 3650.00
- विभागाध्यक्ष-
विभागाध्यक्ष-
स्त्री अध्ययन विभाग
स्त्री-अध्ययन वस्तुत: स्त्रीवादी दृष्टिकोण की निरंतरता में एक अभिप्रयास है जो प्रत्येक व्यक्ति की मानवता एवं समतामूलक समाज में विश्वास करता है। यह समाज के प्रत्येक तबके के अनुभवों को केंद्र में रखकर ज्ञान के प्रति एक नया दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है जो समतामूलक ज्ञान की रूढ़ सीमाओं को तोड़कर ज्ञान को उसके बृहद रूप में प्रस्तुत करता है। अन्तर-अनुशासनिक विषय होने के कारण यह अन्य विषयों के साथ ज्ञानात्मक संबंध भी स्थापित करता है। स्त्री अध्ययन की शुरूआत इस तथ्य के साथ हुई है कि स्त्री या पुरुष होना मात्र जैविकीय ही नहीं, सामाजिक निर्मिति भी है।
'स्त्री अध्ययन' सिर्फ स्त्रियों का या स्त्रियों के लिए ही विषय नहीं है बल्कि यह विभिन्नताओं का संयोजन है। यह 'सम्पूर्ण मानवता' का अध्ययन है जिसके जरीए हम हाशिए पर खड़े उन सभी समूहों का अध्ययन करते हैं जिसे मुख्यधारा का ज्ञान नजरअंदाज करता है तथ हाशिए पर मानकर चलता है।
स्त्री अध्ययन की कक्षाएँ बदलाव की शैक्षणिक, राजनीति के तहत संचालित होती हैं। सामाजिक व्यवस्था में परिवर्तन इस विषय का केन्द्रीय अभिप्रेरक बिन्दु है। नीरा देसाई के अनुसार ''स्त्री-अध्ययन आंदोलन को अकादमिक से एवं अकादमिक को आंदोलन के साथ जोड़ सकता है।'' इस विचार को हमने अपनी कक्षाओं में महसूस किया है। भारतीय स्त्री-अध्ययन संगठन के संस्थापक सदस्यों ने भी इसे एक 'शैक्षणिक रणनीति' के रूप में देखा, जिसके द्वारा स्थापित व्यवस्था में परिवर्तन संभव है। न सिर्फ विचारों के स्तर पर बल्कि जमीनी स्तर पर भी उनका मानना है कि हम सभी एक ऐसी दुनिया में जी रहे हैं जो लैंगिक पूर्वाग्रहों एवं पितृसत्ताात्मक मूल्यों से ग्रसित है। इस व्यवस्था में परिवर्तन करने की आवश्यकता है जिसमें 'स्त्री अध्ययन' एक साधन का कार्य करेगा।
महात्मा गांधी अन्तराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा का यह स्त्री-अध्ययन विभाग अपने वास्तविक जनतान्त्रिक स्वरूप में स्त्री-अध्ययन की मूल अभिप्रेरणाओं से संचालित है। हम इसे स्त्री-विमर्श का अन्तरराष्ट्रीय केन्द्र बनाने में प्रयासरत हैं।
- पाठ्यक्रम
- 1. एम.ए. स्त्री अध्ययन
में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्त्री विमर्श को विस्तार देने की दृष्टि से एम.ए. स्त्री अध्ययन में दो वर्षीय पाठ्यक्रम चलाया जा रहा है। यह पाठ्यक्रम चार छमाहियों में पूरा होता है। यह पाठ्यक्रम 64 क्रेडिट का है। इसके साथ ही कम्प्यूटर का अध्ययन अनिवार्य है जो प्रत्येक छमाही में 2 क्रेडिट का है। इस पाठ्यक्रम में कुल 28 सीटें हैं।
योग्यता :
किसी भी अनुशासन में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक ;10+2+3 पाठ्यक्रम परीक्षा उत्तीर्ण। ;अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए 45 प्रतिशत
शुल्क
- प्रवेश शुल्क : रु. 150.00
- छमाही शिक्षण शुल्क : रु. 500.00
- सुरक्षा शुल्क (प्रत्यर्पणीय) : रु. 250.00
- पुस्तकालय/प्रयोगशाला संरक्षण शुल्क : रु. 200.00
- पुस्तकालय शुल्क (वार्षिक) : रु. 50.00
- खेलकूद शुल्क (वार्षिक) : रु. 50.00
- परिचय पत्र शुल्क : रु. 20.00
- सांस्कृतिक कार्यक्रम शुल्क : रु. 25.00
- इंटरनेट शुल्क (वार्षिक) : रु. 200.00
- चिकित्सा शुल्क (वार्षिक) : रु. 50.00
- अकादमिक/परियोजना भ्रमण : रु. 110.00
- कुल : रु. 1605.00
- 2. एम.फिल. स्त्री अध्ययन
एम.फिल. स्त्री अध्ययन पाठ्यक्रम एक वर्ष का है जो दो छमाहियों में पूरा होता है। पहली छमाही में तीन प्रश्न-पत्र होंगे। दूसरी छमाही में एक लघुशोधा प्रबंध प्रस्तुत करना होगा और एक मौखिक परीक्षा भी ली जाएगी। पूरा पाठ्यक्रम 22 क्रेडिट का है। पहली छमाही में तीन प्रश्न-पत्र-12 क्रेडिट के होंगे और दूसरी छमाही में लघु शोधप्रबंध 8 क्रेडिट का और मौखिक परीक्षा 2 क्रेडिट की होगी। इस पाठ्यक्रम में कुल 14 सीटें हैं।
योग्यता :
सम्बध अनुशासन या समाज विज्ञान की किसी भी विधा में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों के साथ किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर परीक्षा उत्तीर्ण। (अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए 50 प्रतिशत)
शुल्क
- प्रवेश शुल्क : रु. 150.00
- छमाही शिक्षण शुल्क : रु. 500.00
- सुरक्षा शुल्क (प्रत्यर्पणीय) : रु. 250.00
- पुस्तकालय/प्रयोगशाला संरक्षण शुल्क : रु. 200.00
- पुस्तकालय शुल्क (वार्षिक) : रु. 50.00
- खेलकूद शुल्क (वार्षिक) : रु. 50.00
- परिचय पत्र शुल्क : रु. 20.00
- सांस्कृतिक कार्यक्रम शुल्क : रु. 25.00
- इंटरनेट शुल्क (वार्षिक) : रु. 200.00
- चिकित्सा शुल्क (वार्षिक) : रु. 50.00
- अकादमिक/परियोजना भ्रमण : रु. 300.00
- कुल : रु. 1870.00
- 3. पी-एच.डी. स्त्री अध्ययन
पी-एच.डी. स्त्री अध्ययन के अंतर्गत पी-एच.डी. पाठ्यक्रम चल रहा है।
योग्यता :
सम्बध अनुशासन में किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर परीक्षा उत्तीर्ण। (अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लिए 50 प्रतिशत)
वांछनीय : सम्बध अनुशासन में एम.फिल./जे.आर.एफ./नेट/अन्य राष्ट्रीय परीक्षा।
शुल्क
- पंजीकरण शुल्क : रु.300.00 (केवल प्रवेश के समय)
- कम्प्यूटर शुल्क : रु.1000.00 (प्रति वर्ष)
- पुस्तकालय शुल्क : रु.300.00 (प्रति वर्ष)
- प्रतिभूति राशि : रु.1000.00 (प्रतिदेय)
- परीक्षा शुल्क : रु.1000.00S (शोध प्रस्तुति के समय)
- चिकित्सा शुल्क : रु. 50.00 (वार्षिक)
- कुल : रु.3650.00
- 4. स्त्री अध्ययन में पी.जी. डिप्लोमा (2 वर्ष,अंशकालिक)
यह दो-वर्षीय अंशकालिक पाठ्यक्रम है।
योग्यता :
किसी भी अनुशासन में मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (10+2+3 पाठ्यक्रम) परीक्षा उत्तीर्ण।
शुल्क: रु. 1500/-
- संकाय सदस्य
संकाय सदस्य
विभागाध्यक्ष : प्रो. शंभु गुप्त
1- प्रो. इलीना सेन प्रोफेसर मार्च 21, 2007
2- सुश्री सुप्रिया पाठक असिस्टेंट प्रोफेसर मार्च 20, 2007
3- सुश्री अवन्तिका शुक्ला असिस्टेंट प्रोफेसर मार्च 27, 2007
4- श्री शरद जायसवाल असिस्टेंट प्रोफेसर जुलाई 9, 2009
विभाग में प्रवेश के लिए पात्रता एवं निर्धारित स्थान
| अ.क्र |
पाठ्यक्रम |
कुल स्थान |
पात्रता |
| 1 |
एम.ए. स्त्री अध्ययन |
20 |
किसी भी विषय में स्नातक ; अभिरूचि |
| 2 |
एम.फिल. स्त्री अध्ययन |
14 |
एम.ए. स्त्री अध्ययन/सामाजिक विज्ञान/मानविकी |
| 3 |
पी-एच.डी. स्त्री अध्ययन |
-- |
स्त्री अध्ययन/सामाजिक विज्ञान/मानविकी में स्नातकोत्तार तथा 3 वर्ष का शोध अनुभव। |
अकादमिक गतिविधियाँ
|
अ.क्र |
विषय
|
तिथि
|
टिप्पणी
|
संकाय-शोधार्थी
अन्तरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय समन्वय
विभाग के कार्यक्रमों को समृळ करने हेतु यह विभाग राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय संगठनों के साथ संपर्क स्थापित करने को प्रयासरत है। इस दिशा में वे संस्थान जो स्त्री अध्ययन की दिशा में कार्यरत हैं, जैसे - स्त्री अध्ययन विद्यापीठ, जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता, असर रिर्सोस सेन्टर लाहौर, ;पाकिस्तानध्द सेन्टर फॉर वीमेन्स डेवलपमेन्ट स्टडीस, न्यु दिल्ली, सेन्टर नेशनल रेशर्श साइन्टिफिक ;फ्रांसध्द, डिपार्टमेन्ट ऑफ ओरियन्टल स्टडीज ;युनिवरसिटी ऑफ रोमध्द, न्यू स्कूल, न्यूयार्क ;यू.एस.ए.ध्द और योर्क यूनिवर्सिटी टोरन्टो, कनाडा के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है। हम हिंदी-भाषी डायसपोरा वाले देशों ;जैसे मॉरीशस, त्रिनिदाद ब्रिटिश गायना आदिध्द में उच्च शिक्षा के संस्थानों के साथ भी संपर्क स्थापित कर रहे हैं।
सलाहकार बोर्ड का गठन
देश भर के स्त्री-अध्ययन संस्थानों के प्रतिनिधि, स्त्री अध्ययन के कार्यकर्ता और विद्वानों के बीच से एक सलाहकार समिति गठित की जा रही है, जो केन्द्र की गतिविधियों और समस्त अकादमिक कार्यक्रमों में दिशा-निर्देशन का कार्य करेगी। प्रारम्भ में निम्नलिखित विशेषज्ञों के एक 'पैनल' का सुझाव दिया जा रहा है, जिनके साथ परामर्श के द्वारा एक कमेटी का गठन किया जायेगा।
पूर्व - प्रो. शमिता सेन, डॉ. कविता पंजाबी
उत्तर-पूर्व - डॉ. लालरिनदिकी रालटे
उत्तर - प्रो. मेरी जॉन, डॉ. उमा चक्रवर्ती, प्रो. कुमकुम राय, प्रो. रूपरेखा वर्मा,
डॉ. कुमकुम संगारी, डॉ. अनामिका, डॉ. साधना आर्या, डॉ. वंदना मिश्रा
दक्षिण - प्रो. उषा रामनाथन, डॉ. ग्रेब्रियल डिट्रीच, डॉ. सी.एस. लक्ष्मी
पश्चिम - प्रो. विद्युत भागवत, डॉ. वंदना सोनालकर, प्रो. विभूति पटेल,
डॉ. मीना गोपाल
अध्ययन बोर्ड का गठन
विभाग स्तरीय अध्ययन बोर्ड का गठन दिनांक 04 अगस्त, 2009 को विश्वविद्यालय के नियमानुसार किया गया है।
1- प्रो. शंभु गुप्त , विभागाध्यक्ष
2- सुश्री सुप्रिया पाठक वरिष्ठ सहायक प्रोफेसर
3- वासंती रमन अतिथि सदस्य
शोध कार्यक्रम
व्यक्तिगत एवं समूह के शोध के साथ-साथ समन्वयी शोध को निम्नलिखित क्षेत्रों में विकसित किया जा रहा है :
1- मध्य भारत के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्त्री के इतिहास सहित मौखिक इतिहास का भी संकलन।
2- मध्य भारत में लोकगाथा, कला एवं संगीत में स्त्री अभिव्यक्ति की तलाश
3- भूमंडलीकरण तथा इसका स्त्री-आजीविका, स्वास्थ्य तथा अवसरों के लगातार कम होते जाने पर प्रभाव।
4- निजी व सार्वजनिक क्षेत्रों में महिलाओं पर हिंसा।
5- समाजवादी नारीवाद के सिळान्त एवं व्यवहार।
6- दलित नारीवाद के दोहरे शोषण के स्वरों की अभिव्यक्ति
7- साहित्य, फिल्म, संगीत व कला में महिलाओं का मूल्यनिष्ठ सांस्कृतिक प्रस्तुतीकरण।
8- महिलाओं हेतु निर्मित उच्च शिक्षा संरचना एवं पाठ्यक्रमों की समीक्षा।
|
अ.क. |
प्रकाशन कार्य योजना
|
|
1. |
स्त्री अध्ययन एम.ए. के पाठ्यक्रम के लिए हिंदी में एक आधार ग्रंथ जिसमें पाठ्यक्रम से संबंधित आवश्यक सामग्री को सम्मिलित किया जा रहा है। |
|
2. |
स्त्री अध्ययन एम.फिल के पाठ्यक्रम के लिए हिंदी में एक आधार ग्रंथऋ जिसमें पाठ्यक्रम से संबंधित आवश्यक सामग्री को सम्मिलित किया जायेगा। |
|
3. |
स्त्री अध्ययन/स्त्री विमर्श से संबंधित हिंदी में एक शोधपत्रिका। |
|
4. |
संगोष्ठी प्रपत्रों तथा चयनित शोध प्रबन्धों का संकलन एवं प्रकाशन। |
पुस्तकालय और अभिलेखागार कार्यक्रम
साहित्यिक, दृश्य-श्रव्य तथा संग्रहणीय सामग्रियों की मदद से एक ऐसा अभिलेखागार बनाने की योजना है जो कि कुछ वर्ष उपरान्त राष्ट्रीय संसाधन के रूप में उभर सके।
विभागाध्यक्ष-
डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर दलित एवं जनजाति अध्ययन केन्द्र
महात्मा गांधी फ्यूजी-गुरुजी शांति अध्ययन केन्द्र
अनुवाद एवं निर्वचन विद्यापीठ

- विभिन्न ज्ञान अनुशासनों में अनुवाद प्रक्रिया का विकास करना।
- हिंदी से विदेशी एवं भारतीय भाषाओ में यंत्रानुवाद की प्रक्रिया का विकास करना।
- निर्वचन को एक स्वतंत्र अनुशासन के रूप में विकसित करना और इस दिशा में अनुसंधान करना।
- विदेशी एवं भारतीय भाषाओं मे हिंदी दुभाषिये तैयार करना।
- अनुवाद को वर्तमान सांस्कृतिक, सामाजिक एवं प्रयोजनपरक प्रविधियों से जोड़ते हुए उसके व्यावहारिक पक्ष को विकसित करना।
- भारतीय एवं वैश्विक परिदृश्य में हिंदी को अनुवाद के माध्यम से सम्पन्न भाषा बनाना।
- अनुवाद अनुशासन को विदेशी और द्वितीय भाषा शिक्षण में एक प्रमुख उपकरण के रूप में विकसित करना।
- प्रतीकान्तरण (Inter Semiotic Translation) का फिल्म, दूरदर्शन, आकाशवाणी एवं रंगमंच आदि में विकास करना।
डायस्पोरा अध्ययन विभाग
Department of Diaspora Studies

पाठ्यक्रम - एम्. फिल. प्रवासन ,डायस्पोरा तथा पार-देशीय सांस्कृतिक अध्ययन
मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ

संचार एवं मीडिया अध्ययन केंद्र
सूचना क्रांति और तकनीकी के इस युग में यह केंद्र जनसंचार के क्षेत्र में समाजोन्मुख वैज्ञानिक अध्ययन एवं अनुसंधान को नए परिप्रेक्ष्य प्रदान कर रहा है। वरिष्ठ पत्रकार एवं मीडिया शिक्षाविद् प्रो. डॉ.अनिल के. राय 'अंकित' (प्रोफेसर एवं निदेशक) के नेतृत्व में प्राध्यापक एवं छात्र इस विभाग को देश का एक उच्चस्तरीय मीडिया-शोध केन्द्र एवं सामाजिक रूपान्तरण में सक्रिय मीडियाकर्मियों का प्रशिक्षण केन्द्र बनाने के लिए प्रतिबध्द हैं। इसके साथ ही वर्तमान मीडिया की आवश्यकताओं के अनुरूप रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रमों को भी प्रमुखता दी जा रही है। प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्चतर प्रशिक्षण के लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और संगोष्ठियों में भाग लेने की सुविधाएं दी जाती हैं। वर्तमान में विभाग में एम.ए. (चार सेमेस्टर), एम.फिल. (दो सेमेस्टर) एवं पी-एच.डी. के पाठ्यक्रम चल रहे हैं। शीध्र ही विभाग द्वारा इलेट्रॉनिक मीडिया में एमएस.सी., टी.वी. पत्रकारिता तथा टी.वी. प्रोडक्शन : एडिटिंग में स्नातकोत्तर डिप्लोमा तथा टी.वी. ऐंकरिंग, टी.वी. रिपोर्टिंग और फिल्म एप्रिसिएशन के सर्टीफिकेट पाठ्यक्रम जैसे कुछ नए पाठ्यक्रमों को भी शुरू किया जायेगा। पत्रकारिता और अकादमिक क्षेत्रों के राष्ट्रीय स्तर के ख्यातिप्राप्त विद्वान व पत्रकार इस विभाग से अतिथि प्राध्यापकों के रूप में जुडे हुए हैं।
मानवविज्ञान विभाग
अकादमिक वर्ष 2009-10 में स्थापित यह विभाग पश्चिम भारत में मानवविज्ञान का दूसरा विभाग है। चूँकि मानवविज्ञान में जनजातीय अध्ययन बहुत प्रमुखता रखता है इसलिए विदर्भ क्षेत्र में स्थित यह विभाग विदर्भ की विशाल जनजातीय जनसंख्या पर महत्तवपूर्ण अध्ययन करेगा। आरंभिक वर्षो में इस विभाग में एम.ए, एम.फिल. व पीएच.डी. स्तर पर केवल सामाजिक मानवविज्ञान में ही विशेषज्ञता अर्जित करने का प्रावधान है। बाद के वर्षो में मानवविज्ञान की दूसरी शाखाओं में भी Advance अध्ययन को जोड़ा जा सकता है।
सृजन विद्यापीठ

नाट्यकला एवं फिल्म अध्ययन विभाग
विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेश शर्मा
एसोसिएट प्रोफेसर - डा. ओमप्रकाश भारती
सहायक प्रोफेसर - डा. सतीश पावड़े
सहायक प्रोफेसर - डा. विधु खरे
पाठ्यक्रम
एम.ए. नाट्यकला एवं फिल्म अध्ययन
यह दो वर्षीय पाठ्यक्रम है जो चार छमाहियों में पूरा होता है। चार छमाहियों का यह नियमित पाठ्यक्रम 64 क्रेडिट का है। इसके साथ ही कम्प्यूटर का अध्ययन अनिवार्य है जो प्रत्येक छमाही में 2 क्रेडिट का है। इस पाठ्यक्रम में इस सत्र में कुल 28 सीटें हैं।
योग्यता : किसी भी अनुशासन में न्यूनतम 40 प्रतिशत अंकों के साथ किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (10+2+3 पाठ्यक्रम) परीक्षा उत्तीर्ण। (अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए 35 प्रतिशत)
प्रवेश प्रक्रिया में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली अथवा भारतेन्दु नाट्य अकादमी जैसे राष्ट्रीय महत्व के अथवा फिल्म संस्थानों से डिप्लोमा प्राप्त अभ्यर्थी बिना लिखित परीक्षा के सीधे साक्षात्कार के लिए बुलाए जाएँगे।
शुल्क : 3845/- (विस्तृत विवरण हेतु विवरणिका देखें)
एम.फिल. नाट्यकला एवं फिल्म अध्ययन
यह एक वर्ष का पाठ्यक्रम है जो दो छमाहियों में पूरा होता है। पहली छमाही में तीन प्रश्न-पत्र होंगे। दूसरी छमाही में एक लघुशोध प्रबन्ध प्रस्तुत करना होगा और एक मौखिक परीक्षा भी ली जाएगी। पूरा पाठ्यक्रम 22 क्रेडिट का है। पहली छमाही में तीन प्रश्न-पत्र 12 क्रेडिट के होंगे और दूसरी छमाही में लघु शोध-प्रबंध 8 क्रेडिट और मौखिक परीक्षा 2 क्रेडिट की होगी। इस पाठ्यक्रम में इस सत्र में कुल 10 सीटें हैं।
योग्यता :सम्बध्द अनुशासन में किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर परीक्षा उत्तीर्ण। (अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लिए 50 प्रतिशत)
शुल्क : 3845/- (विस्तृत विवरण हेतु विवरणिका देखें)
(प्रस्तावित विद्यापीठ)
प्रबंध विद्यापीठ
शिक्षा विद्यापीठ
|
|
|
|