डॉ. अम्बेडकर अध्ययन केन्द्र
डॉ. अंबेडकर अध्ययन केन्द्र मूलत: भारतरत्न डॉ. अंबेडकर द्वारा सामाजिक न्याय के लिए प्रतिपादित विचारों पर अध्ययन-अध्यापन तथा शोध कार्य हेतु प्रतिबध है। यह केन्द्र डॉ. अंबेडकर के जीवन, दर्शन, कार्यों एवं उनके विचारों से संबंधित विषयों का प्रचार-प्रसार के लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी/कार्यशालाओं का आयोजन एवं प्रकाशन कार्य संपादित करता है।
संपर्क पताः
परामर्शदाता
डॉ. अंबेडकर अध्ययन केंद्र,
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वेविद्यालय ,
गांधी हिल्स, मानस मन्दिर,
वर्धा-442001(महाराष्ट्र)
फोनः 07152-251728
कुलपति एवं अध्यक्ष संदेश
भारतीय समाज व्यवस्था की संरचना जातिवादी बुराईयों से भरी पड़ी है, जो आज भी समाज के विकास में बाधक है। डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर द्वरा ऐसी बुराईयों को दूर करने हेतु महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वे अनपढ़ एवं शोषित वर्ग को अपने अधिकार दे लिए जागरूकाता प्रदान करने हेतु असीमित परिश्रम किया। सुशिक्षित एवं संस्कारी बनने का मार्गदर्शन किया। डॉ. अंबेडकर इस देश में धर्मनिरपेक्षता के तत्वों का सामाजिक एवं राजनितीक क्षेत्र में बढ़ाना चाहते थे। डॉ. अंबेडकर के विचारों की समकालिन मूल्य एवं प्रासंगिकता को ध्यान में रखते हुए विश्वकविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से डॉ. अंबेडकर अध्ययन केंद्र द्वारा इस विश्वकविद्यालय को उनके विचारों के प्रचार-प्रसार हेतु जो दायित्व प्रदान किया गया है, मेरा पूर्ण विश्वास है कि यह अध्ययन केंद्र उसे साकार करते हुए विश्वैविद्यालय को गति प्रदान करने में भागीदार होगा।
विभूति नारायण राय
कुलपति म.गा.अ.हि.वि., वर्धा
प्रतिकुलपति संदेश
डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर भारत के युगान्तरकारी सामाजिक चिन्तकों में से एक है। उन्होंने भारतीय समाज व्यवस्था में व्याप्त सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक, मानसिक शोषण एवं विषमताओं को दूर करने और श्रमप्रतिष्ठा स्थापना हेतु क्रांतिकारी-जनहित के विचार एवं संविधान प्रस्तुत किया, जो अखंडता, राष्ट्रीयता एवं धर्मनिरपेक्षता जैसे मूल्यों को कायम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। डॉ. अंबेडकर चिन्तन की वैचारिक शक्तियों को ध्यान में रखते हुए विश्व।विद्यालय अनुदान आयोग द्वारा उनके विचारों एवं कर्मों को अकादमिक अध्ययन, अध्यापन तथा शोध कार्य हेतु व्यवहारिक रूप से जिस तरह का प्रोत्साहन प्रदान कर रहा है, यह अत्यंत सुखदायक है। मेरा विश्वास है कि यह अध्ययन केंद्र विश्वपविद्यालय अनुदान आयोग की योजनानुसार उच्च स्तर का स्थान प्राप्त करते हुए इस विश्वनविद्यालय की अवधारणा के अनुरूप प्रगति करेगा।
प्रो. ए. अरविंदाक्षन
प्रतिकुलपति म.गा.अ.हि.वि., वर्धा
परामर्शदाता संदेश
डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के विचार ऐसे मूल्यों का संवहन करता है, जो सामाजिक बुराईयों को दूर करने हेतु स्वःत ही प्रतिबध हैं। उनके विचार मानव जाति में व्याप्त निम्न वर्ग, अल्पसंख्यक, स्त्री एवं शिशुओं के खिलाफ व्यवहृत अमानवीय परंपराओं को निर्मूलन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। भारत जैसे देश से ऐसी सामाजिक बुराईयों के विरूध लड़ने हेतु उन्होंने संविधानिकता का भी प्रावधान किया है। दूसरी ओर उनके विचार विश्वभर में भिन्न-भिन्न रूप से सक्रिय विषमताओं के खिलाफ भी स्वर प्रदान किया है। मेरे लिए यह बहुत ही सुखप्रद है कि बाबासाहेब जैसे युग पुरुष जो केवल भारत के ही नहीं विश्व के महान सामाजिक चिंतक के विचारों के प्रचार-प्रसार हेतु कार्य करने का निमित्व हूँ। युगान्तरकारी सामाजिक चिंतक डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के विचारों को जन-जन तक पहूँचाने हेतु विश्वाविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा पोषित तथा आयोग के लक्ष्य एवं उद्देश्यों को कार्यान्वित करने हेतु यह अध्ययन केंद्र पूर्णतः प्रतिबध है।
डॉ. एम. एल. कासारे
परामर्शदाता
डॉ. अंबेडकर अध्ययन केंद्र
प्रकाशन हेतु प्रस्तावित पुस्तक
डॉ. अंबेडकर अध्ययन केंद्र की ओर से डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर द्वारा लिखित पुस्तक Annihilation of Caste पर आधारित ‘‘अॅनाईइलेशन ऑफ कास्ट: समकालीन प्रासंगिकता एवं मुल्य’’ विषय पर संकलित पुस्तक प्रकाशन हेतु प्रस्तावित है। ज्ञातव्य है कि डॉ. अंबेडकर द्वारा 1936 में लिखित यह पुस्तक भारत जाति-प्रथा के ख़िलाफ आन्दोलन का एक महत्त्वपूर्ण वैचारिकी है।
प्रस्तावित शोध-कार्य
केन्द्र के रिसर्च एसोचिएट द्वारा ‘‘वर्धा बन्दीगृह में उत्पाद कानुन के अन्तर्गत बन्दीः एक केस स्टाडी’’ विषय पर शोध कार्य प्रगति पर है।
संपन्न किये गए विशेष व्याख्यान
1. विषयः डॉ. अंबेडकर की धर्म विषयक संकल्पना
दिनांकः 19 सितंबर,2010
वक्ताः श्री एन.जी.कांबले; रिटायर्ड पोस्टल ऑफीसर, नागपूरद्ध,
डॉ.गौतम कांबले अधिव्याख्याता, डॉ. अम्बेडकर महाविद्यालय दीक्षाभूमि, नागपूर तथा धमोपदेशक आचार्य सूर्यकान्तजी भगत, सेवाग्राम
2. विषय: “डॉ.बाबासाहब का धम्मचिंतन और 22 प्रतिज्ञा’ ‘क्रांति और
प्रतिक्रांति”
दिनांकः 10 अक्टूबर, 2010
वक्ताः डॉ. गौतम कांबले; अधिव्याख्याता डॉ. अंबेडकर महाविद्यालय, दिक्षाभूमि, नागपुर
3. विषयः “डॉ.बाबासाहेब के आर्थिक एवं सामाजिक
जनतंत्र के विचार”
दिनांकः 01 नवेंबर, 2010
वक्ताः डॉ. एस. एन. बूसी, हैदराबाद
4. विषयः “भारतीय संविधान में महिलाएँ”
दिनांकः 29 नवेंबर, 2010
वक्ताः डॉ. एम. एल. कासारे, डॉ. रंभा सोनाये, प्राचार्य, प्रियदर्शिनी महिला महाविद्यालय, वर्धा
5. विषयः “डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के शिक्षा संबंधी
विचार”
दिनांकः 19 दिसंबर, 2010
वक्ताः डॉ. एम. एल. कासारे,
6. विषयः ‘‘बौद्ध धर्मान्तरण के उपरान्त आर्थिक एवं
सामाजिक प्रभावः महाराष्ट्र के संदर्भ’’
दिनांकः 05 जनवरी, 2011
वक्ताः भदंत विमलकित्ति गुणसिरी,
7. विषयः ‘‘बौद्ध धम्मविकास में डॉ.बाबासाहेब अंबेडकर
का योगदान’’
दिनांकः 14 जनवरी, 2011
वक्ताः डॉ. शूरा दारापुरी, शिमला विश्व विद्यालय , शिमला
8. विषयः ‘‘डॉ. बाबासाहेब के शैक्षणिक विचार’’
दिनांकः 22 जनवरी, 2011
वक्ताः श्री हाडके गुरूजी
9. विषयः ‘‘अंबेडकरवाद’’
दिनांकः 12 मार्च, 2011
वक्ता : प्रो. तुलसीराम, जे.एन.यू, दिल्ली
10. विषयः ‘‘भारत में शिक्षा की चुनौतियाँ’’
दिनांकः 15 मार्च, 2011
वक्ताः श्री सुनील, सामाजिक कार्यकर्ता, होशंगाबाद, म.प्र.
11. विषयः ‘‘डॉ. अंबेडकर एवं गांधी: वैचारिक विमर्श’’
दिनांकः 18 मार्च, 2011
वक्ताः डॉ. एस. एन. बुसी, प्रो. एस .व्ही. खांदेवाले
संपन्न किये गए राष्ट्रीय संगोष्ठी
1. विषयः ‘‘दलित आत्मकथाएँ मनुष्य बनने की छटपटाहट
संदर्भः वर्ण व्यवस्था”
दिनांकः 19, 20 फरवरी 2011
डॉ. अंबेडकर अध्ययन केंद्र द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित किया गया। इस संगोष्ठी में हिंदी एवं मराठी के दलित आत्मकथा के लेखकों ने अपने अपने विचार प्रस्तुत किये।
अध्यक्षः महामहिम पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद, जे. एन. यू. विश्व्विद्यालय के प्रो. तुलसीराम
वक्ताः शरन कुमार निंबाले, सुशीला ताकबडे, प्रो. सूरज पालिवाल, डॉ. राम सिंह, डॉ. गोविंद प्रसाद, प्रो. हेमलता महेश्वर, प्रो. के. के. सिंह, प्रो. संतोष भदौरिया एवं डॉ. उमेश कुमार सिंह।
समन्वयकः प्रो. सूरज पालिवाल
2. विषयः ‘‘भारत में उग्र वामपंथ के मुद्दे’’
दिनांकः 30-31 मार्च 2011
डॉ. अंबेडकर अध्ययन केंद्र द्वारा विश्व0विद्यालय के अन्य केन्द्र के सहयोग से दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित है। इस संगोष्ठी में देश के कई गण मान्य विद्वान उपस्थित थे।
अध्यक्षः श्री विभूति नारायण राय, कुलपति, म.गा.अ.हि.वि.वर्धा
मुख्य अतिथिः माननीय न्यायमूर्ति श्री पी.वी. सावंत
बीज वक्तव्यः प्रो. नदीम हसनैन
विशेष वक्तव्यः श्री असगर अली इंजीनियर
वक्ताः प्रो. रामदयाल मुण्डा, श्रीमती राधा भट्ट, श्री शीतला सिंह, प्रो. एस. एम. सक्सेना, प्रो. एस. एन. चौधरी, डॉ. वासंती रमण, श्री संदीप पांण्डेय, डॉ. शम्सूल इस्लाम, प्रो. रमेश दीक्षित, श्री प्रकाश दुबे एवं श्री गिरीश मिश्र संगोष्ठी
समन्वयकः प्रो. ए. अरविंदाक्षन, प्रतिकुलपति, म.गा.अ.हि.वि., वर्धा
डॉ. भदन्त आनन्द कौसल्यायन बौद्ध-अध्ययन केंद्र
14 अप्रैल, 2004 को वर्धा स्थित राष्ट्रभाषा प्रचार समिति में बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर की जयंती के दौरान कार्यक्रम के अध्यक्ष व महात्मा गांधी
अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति प्रो. जी. गोपीनाथन द्वारा भारतीय संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर के अगाध हिंदी-प्रेम
एवं हिंदी के प्रति उनकी संवैधानिक प्रतिबद्धता को देखकर और भारत में बौद्ध धम्म एवं दर्शन को पुनर्जीवित करने के, उनके कार्य को सुदृढ़ आधार प्रदान करने के
लिए विश्वविद्यालय में 'डॉ. भदन्त आनन्द कौसल्यायन बौद्ध अध्ययन केंद्र' की आधारशिला रखी गई।
जिस प्रकार वर्धा से महात्मा गांधी का नाम जुड़ा है, उसी प्रकार वर्धा की राष्ट्रभाषा प्रचार समिति एवं भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से डॉ. भदन्त आनन्द
कौसल्यायन का नाम जुड़ा है। वे सन् 1942 से सन् 1951 तक राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के प्रधानमंत्री रहे। हिंदी और बौद्ध धम्म व दर्शन के क्षेत्र में
भदन्त जी का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है, उन्होंने पालि भाषा के त्रिपिटक व अट्ठकथाओं समेत कई प्रमुख बौद्ध ग्रंथों का हिन्दी भाषा में अनुवाद किया। उनके इस
विशेष योगदान को देखते हुये ही, इस केंद्र का नाम 'डॉ. भदन्त आनन्द कौसल्यायन बौद्ध अध्ययन केंद्र' रखा गया।
आज जिस प्रकार पूरे विश्व में युद्ध, हिंसा, अराजकता, नफरत और असहिष्णुता का माहौल व्याप्त है, ऐसे में बौद्ध-धम्म-दर्शन की मैत्री, करुणा, शील एवं समस्त
प्राणियों के प्रति व्यापक कल्याण की भावना का प्रचार-प्रसार एवं अध्ययन-अध्यापन और शोध, संपूर्ण प्राणी जगत के लिए बेहद जरूरी एवं उपयोगी है। बौद्ध दर्शन
मनुष्यता एवं समाज के लिए उच्च मानवीय मूल्यों, सदाचार व नैतिकता एवं विश्व-बंधुत्व की भावना को स्थापित करता है। यह अध्ययन केंद्र इन उद्देश्यों को
पूरा करने के लिए कृत संकल्प है। बौद्ध धम्म एवं दर्शन से संबंधित अनेक दुर्लभ ग्रंथ, लेख, शिलालेख एवं अभिलेख ब्रह्मी लिपि, पालि भाषा, संस्कृत, बौद्ध संकर
संस्कृत, चीनी भाषा, तिब्बती आदि भाषाओं में संकलित हैं। जिन पर अभी भी गम्भीर शोध किये जाने की आवश्यकता है। आज भी इनका हिंदी भाषा में अनुवाद, बौद्ध
अध्ययन की अकादमिक तथा सामाजिक उपयोगिता के लिए बहुत जरूरी है। यह केंद्र इस दिशा में गंभीर प्रयास करेगा।
इस अध्ययन केंद्र के अंतर्गत अन्य विश्वविद्यालयों से संयुक्त भूमिका के तहत श्रीलंका के केलानिया विश्वविद्यालय द्वारा सहयोग लेते हुये, बौद्ध साहित्य
एवं बौद्ध दर्शन पर लघु पाठ्यक्रमों का संयोजन किया जाएगा। दोनों विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों, शोधार्थियों व अध्यापकों को सुविधा प्रदान करते हुये एक
दूसरे के यहॉं अध्ययन-अध्यापन के लिए आमंत्रित करेंगे। बाहर के बौद्ध अध्येताओं एवं विद्ववानों को शोध व पठन-पाठन के लिए विश्वविद्यालय द्वारा आवासीय सुविधा
प्रदान की जाएगी।
इस केंद्र के अंतर्गत निम्नलिखित पाठ्यक्रम संचालित हैं :-
3.7.1 एम.ए. बौद्ध-अध्ययन
हिंदी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बौद्ध अध्ययन को विस्तार देने की दृष्टि से एम.ए. बौद्ध अध्ययन में दो वर्षीय पाठ्यक्रम सत्र 2009-2010 से चलाया जा रहा
है। जो 14 प्रश्नपत्रों और एक परियोजना शोधकार्य व मौखिकी के साथ चार सेमिस्टर में पूरा होता है, जो 64 क्रेडिट का है। इसके साथ ही किसी एक भारतीय अथवा विदेशी
भाषा में सर्टिफिकेट/डिप्लोमा करना और आज के तकनीकी युग को दृष्टिगत रखते हुए कंप्यूटर का अध्ययन भी अनिवार्य है, जो प्रत्येक छमाही में 2 क्रेडिट का है।
एम.ए. बौद्ध अध्ययन में कुल 28 सीटें हैं।
योग्यता:
किसी भी अनुशासन में न्यूनतम 40% अंकों के साथ किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (10+2+3 पाठ्यक्रम) परीक्षा उत्तीर्ण। (अनुसूचित जाति/अनुसूचित
जनजाति के लिए 35% अंक)
3.7.2. बौद्ध अध्ययन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा
यह पाठयक्रम सत्र 2008-2009 में आरंभ हुआ, जो इस केंद्र का सबसे पहला पाठ्यक्रम है। जो अभ्यर्थी बौद्ध अध्ययन में रूचि रखते हैं लेकिन दूसरे पाठ्यक्रमों के भी
नियमित छात्र हैं अथवा जो लोग सरकारी या गैरसरकारी संस्थानों में कार्यरत हैं, उनको विशेषरूप से ध्यान में रखकर यह अंशकालिक पाठ्यक्रम चलाया जा रहा है। इसकी
कक्षाऍ प्राय: सायंकाल में ही संचालित की जाती हैं।
अवधि:
यह एक वर्षीय अंशकालिक पाठ्यक्रम है, जो पाँच प्रश्नपत्र और एक परियोजना शोधकार्य व मौखिकी के साथ पूरा होता है।
योग्यता:
किसी भी विषय में स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण।
3.7.3 पालि भाषा एवं साहित्य में स्नातकोत्तर डिप्लोमा
यह पाठयक्रम सत्र 2010-2011 में आरंभ हुआ। जो लोग पालि भाषा एवं साहित्य के प्रति जिज्ञासु हैं और वे उसको जानना एवं सीखना चाहते हैं लेकिन दूसरे पाठ्यक्रमों
में भी अध्ययनरत हैं अथवा जो लोग सरकारी या गैरसरकारी संस्थानों में कार्यरत हैं, उनको विशेषरूप से ध्यान में रखकर यह अंशकालिक पाठ्यक्रम चलाया जा रहा है।
इसकी कक्षाएँ सांयकाल में संचालित की जाती हैं।
अवधि:
यह एक वर्षीय अंशकालिक पाठ्यक्रम है, जो पॉंच प्रश्नपत्र और एक परियोजना शोधकार्य व मौखिकी परीक्षा के साथ पूरा होता है।
योग्यता:
किसी भी विषय में स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण।
3.7.4 बौद्ध पर्यटन एवं गाइडिंग में स्नातकोत्तर डिप्लोमा
आज पूरी दुनिया में पर्यटन एक उभरता हुआ व्यवसाय है, कई देशों की अर्थव्यवस्था एवं आय का साधन पर्यटन उद्योग ही है। प्राचीनकाल से ही संसार के अनेक देशों के
लिए भारत का बौद्ध धम्म और उससे जुड़े ऐतिहासिक स्थल सदैव आकर्षण व भ्रमण का केंद्र रहें हैं। भारत में बौद्ध पर्यटन की व्यापक संभावनाओं को ध्यान में रखकर,
यह रोजगारपरक पाठयक्रम सत्र 2011-2012 से आरंभ किया गया है। क्योंकि आज हम देखते हैं कि पुरातत्व महत्व के बौद्ध स्थलों पर प्रशिक्षित मार्गदर्शक, टूर
आपरेटर व गाईड का अभाव है। इस दृष्टि से यह पाठयक्रम व्यापक रूप से रोजगार के अवसर भी उपलब्ध करायेगा। जो लोग बौद्ध पर्यटन एवं गाइडिंग में रूचि रखते हैं अथवा
जो सरकारी या गैरसरकारी संस्थानों में कार्यरत हैं, उनको विशेषरूप से ध्यान में रखकर यह अंशकालिक पाठ्यक्रम चलाया जा रहा है। इसकी कक्षाऍ सांयकाल में संचालित
की जाती हैं।
अवधि:
यह एक वर्षीय अंशकालिक पाठ्यक्रम है, जो पॉंच प्रश्नपत्र और एक परियोजना शोधकार्य व मौखिकी परीक्षा के साथ पूरा होता है।
योग्यता:
किसी भी विषय में स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण।
3.7.5 तिब्बती भाषा एवं तिब्बती बौद्ध धर्म में स्नातकोत्तर डिप्लोमा
यह पाठयक्रम सत्र 2011-2012 में आरंभ हुआ है। प्राचीन बौद्धकाल से ही भारत के तिब्बत के साथ बहुत ही प्रगाढ़ सांस्कृतिक संबंध रहें हैं। आज भी बहुत सारा बौद्ध
साहित्य तिब्बती भाषा से हिंदी में अनूदित होना बाकी है, यदि यह संभव हो जाये तो प्राचीन भारत की बहुत सारी ऐतिहासिक व सामाजिक शोध सामग्रियों का विपुल भंडार
हमारे समक्ष होगा, जो कई नवीन शोध जानकारियों का स्त्रोत उपलब्ध करायेगा। इस दृष्टिकोण से यह पाठ्यक्रम बेहद उपयोगी भूमिका निभाएगा। इसलिए जो लोग इसमें रूचि
रखते हैं, लेकिन दूसरे पाठ्यक्रमों के भी नियामित छात्र हैं तथा जो लोग सरकारी या गैरसरकारी संस्थानों में कार्यरत हैं, उनको भी विशेषरूप से ध्यान में रखकर यह
अंशकालिक पाठ्यक्रम चलाया जा रहा है। इसकी कक्षाएँ सांयकाल में संचालित की जाती हैं।
अवधि:
यह एक वर्षीय अंशकालिक पाठ्यक्रम है, जो पॉंच प्रश्नपत्र और एक परियोजना शोधकार्य व मौखिकी परीक्षा के साथ पूरा होता है।
योग्यता:
किसी भी विषय में स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण।
3.7.6. एम.फिल. बौद्ध अध्ययन
यह पाठ्यक्रम एक वर्ष का है, जो दो छमाहियों में पूरा होता है। पहली छमाही में दो प्रश्नपत्र होंगे और एक टर्म पेपर व पुस्तक समीक्षा करनी होगी। दूसरी छमाही
में एक लघु शोध प्रबंध लिखना होगा और एक मौखिकी भी ली जाएगी। पूरा पाठ्यक्रम 28 क्रेडिट का है। पहली छमाही में दो प्रश्नपत्र, टर्म पेपर व पुस्तक समीक्षा 18
क्रेडिट के होंगे और दूसरी छमाही में लघु शोध प्रबंध 8 क्रेडिट का और मौखिकी 2 क्रेडिट की होगी।
योग्यता:
किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से न्यूनतम 55%अंको सहित बौद्ध अध्ययन/पालि में स्नातकोत्तर उपाधि उत्तीर्ण(अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति
अभ्यर्थियों हेतु न्यूनतम 50% अंकों सहित उत्तीर्ण)
वांछनीय:
बौद्ध अध्ययन/ पालि में जे.आर.एफ./नेट/समकक्ष राष्ट्रीय परीक्षा उत्तीर्ण अभ्यार्थियों को वरीयता दी जाएगी।
3.7.7. पी-एच.डी. बौद्ध अध्ययन
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (एम.फिल./पी-एच.डी.) उपाधि के लिए न्यूनतम मानक एवं प्रक्रिया विनियम, 2009 के अनुसार यह पाठ्यक्रम संचालित है।
योग्यता:
किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से न्यूनतम 55%अंको सहित बौद्ध अध्ययन/पालि में स्नातकोत्तर उपाधि उत्तीर्ण (अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति
अभ्यर्थियों हेतु न्यूनतम 50% अंको सहित उत्तीर्ण)
वांछनीय:
बौद्ध अध्ययन/पालि में एम.फिल./जे.आर.एफ./नेट/समकक्ष राष्ट्रीय परीक्षा उत्तीर्ण अभ्यार्थियों को वरीयता दी जाएगी। अभ्यर्थी आवेदनपत्र के साथ भेजने वाले
शोधप्रारूप (Synopsis) में एकरूपता लाने के लिए डॉ. भदन्त आनद कौसल्यायन बौद्ध अध्ययन केन्द्र की वेबसाइट http://buddhiststudiescenter.webs.com/ से सहायता
लेने का कष्ट करेंगे, निर्धारित मानक के अनुसार बनाये गये शोधप्रारूप ही स्वीकार किये जायेंगे, अस्पष्ट शोधप्रारूप व अपूर्ण आवेदनपत्र अमान्य होगा। जो
अभ्यर्थी एम.ए. के बाद सीधे पी-एच.डी. में प्रवेश लेंगे उन्हें एक छमाही का कोर्स वर्क करना अनिवार्य होगा।
नेहरू अध्ययन केन्द्र
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय ,पोस्ट मानस मंदिर, गांधी हिल्स, वर्धा, महाराष्ट्र 442001

कुलपति का संदेश---
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की स्थापना कई महत्वपूर्ण उद्देश्यों को समेकित रूप से कार्यानवित करने हेतु की गई है। हिन्दी को आम-फहम भाषा बनाने के साथ ही साथ विभिन्न अंतरानुशासनिक विषयों के उत्थान एवं शोधपरक अध्ययन को तरजीह देना विश्वविद्यालय के चरित्र का वैशिष्ट्य है। परंपरागत पाठ्यक्रम से अवगत छात्रों को विशिष्ट एवं तकनीकी रुप से समसामयिक विकसनशील पाठ्यक्रम उपलब्ध कराना विश्वविद्यालय अपना कार्यक्षेत्र मानता है ।
निजी तौर पर मैं विश्वविद्यालयों के संबंध में देश के प्रथम प्रधान-मंत्री जवाहरलाल जवाहरलाल नेहरू के शब्दों को दुहराना चाहूंगा-- “विश्वविद्यालय मानववाद के लिए, सहिष्णुता के लिए, विचारों को आगे बढाने के लिए और सत्य की खोज के लिए है.....अपने कर्तव्य कि भली-भांति अच्छे से अच्छे ढंग से पूरा करने में गर्व का अनुभव होना चाहिए । यदि आप वैजानिक हैं तो विश्वविद्यालय में महज शिक्षक बनने की नही, आइन्स्टीन बनने की अभिलाषा रखिए । यदि आप चिकित्सक हैं तो ऐसी खोज करने की सोचिए जिससे मनुष्यजाति का घाव भर सके।” विश्वविद्यालय एक मंच होता है जहां से अंतहीन विचारों को अमली जामा पहनाया जाता है। यहां विभिन्न विचारधाराओं का संघर्ष, मतैक्य ,विवाद, संवाद, प्रश्नाकुलता, सभी को समान रूप से जगह मिलती है। यह विश्वविद्यालय जान को इस रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें से शिक्षा प्राप्त विद्यार्थी देश के भविष्य के धरोहर एवं संसाधन साबित हो सकें ।
इन्हीं दृष्टिकोण को आगे बढाते हुए विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सहयोग से इपोक मेकिंग (Epoc Making) योजना के अंतर्गत नेहरू अध्ययन केंद्र स्थापित की गई है । इस केंद्र के द्वारा विभिन्न अकादमिक गतिविधियों के आयोजन एवं समसामयिक विषयों का अध्ययन किया जाएगा ।---विभूति नारायण राय

निदेशक की कलम से –
जवाहरलाल नेहरू ने आजाद भारत में शिक्षा के लिए कई विकसनशील संस्थाओं को स्थापित किया, उनका मुल उद्देश्य भारत को शिक्षा के स्तर पर राष्ट्र को नई उचाईयां प्रदान करना था । योजना आयोग हो या फिर प्रोद्योगिकी संस्थानों सभी की स्थापना को समान रूप से प्रश्रय देते हुए। देश को एक नई शिक्षा-नीति से समृद्ध करने का महती प्रयत्न किया । आज जबकि देश कि आजादी को प्राप्त किये हुए लगभग साठ वर्ष से का समय बीत चुका है अब समय आ चुका है। जब संस्थागत रूप से जवाहरलाल नेहरू के दूरदर्शिता को व्याख्यायित कर उनके द्वारा सुझाये गये मार्ग का अनुसरण किया जाय । उनका दॄढ़ विश्वा स था कि विश्वविद्यालय अपने छात्रों के मन में उन आधारभूत मूल्यों को सहेजते हुए राष्ट्र के स्वरूप को बदलने और उसे शक्तिशाली बनाने में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं जिनमे वे विश्वास रखते हैं। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय स्थित नेहरू अध्ययन केंद्र, अध्ययन, अनुसंधान और अपने संगठित जीवन के उदाहरण और प्रभाव द्वारा ज्ञान का प्रसार तथा अभिवृद्धि करना, उन सिद्धान्तों के विकास के लिए प्रयास करना, जिनके लिए जवाहरलाल नेहरू ने जीवन-पर्यंत काम किया। जैसे - राष्ट्री य एकता, सामाजिक न्याय, धर्म निरपेक्षता, जीवन की लोकतांत्रिक पद्धति, अन्तरराष्ट्री य समझ और सामाजिक समस्याओं के प्रति वैज्ञानिक दॄष्टिकोण। केंद्र भावी भविष्य में इन्हीं मानदण्डों के अनुरूप कार्य करने की दिशा में अपनी सक्रियता बनाये रखने की दिशा में प्रतिबद्ध है। --प्रो.ए अरविंदाक्षन
सलाहकार समिति- माननीय कुलपति महोदय द्वारा दिनांक 01.10.2010 को नेहरू अध्ययन केंद्र के सलाहकार समिति का गठन निम्नानुसार किया गया-
1. कुलपति एवं अध्यक्ष -- माननीय श्री विभूतिनारायण राय
2. प्रतिकुलपति एवं निदेशक -- माननीय प्रो. ए.अरविंदाक्षन
बाह्य-सदस्य-
1 डॉ. इन्द्रनाथ चौधुरी
2 डॉ. दीपक मलिक
आंतरिक सदस्य-
1 डॉ. सूरज पालीवाल
2 डॉ. संतोष भदौरिया
रिसर्च एसोशिएट एवं सदस्य सचिव-
1 शिवप्रिय
नेहरू अध्ययन केंद्र के सलाहकार समिति की प्रथम बैठक 06 अक्टूबर 2010 को सम्पन्न हुई । इस बैठक में केंद्र के द्वारा विभिन्न कार्यक्रम आयोजन, केंद्र के द्वारा व्याख्यानों के आयोजन, केन्द्र के द्वारा कार्यशालाओं के आयोजन, केंद्र के द्वारा प्रस्तावित शोध कार्य के संदर्भ में, नेहरू पर पुस्तक का प्रकाशन, केंद्र के पुस्तकालय के लिए पुस्तकों की खरीद के संदर्भ में, केंद्र के उपकरणों की खरीद के संदर्भ में विचार विमर्श कर उन्हें अनुमोदन प्रदान किया गया। इस बैठक में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा प्रतिनिधि का नामांकन नहीं हो पाने के कारण एवं प्रो. सूरज पालीवाल (आंतरिक सदस्य ) कर्तव्यावकाश पर होने के कारण बैठक में भाग नहीं ले सके ।
नेहरू अध्ययन केंद्र के द्वारा आयोजित कार्यक्रमों की रूपरेखा |
1. नेहरू अध्ययन केंद्र के द्वारा दिनांक 06.10.2010 को हबीब तनवीर सभागृह में प्रो. इन्द्रनाथ चौधुरी, नयी दिल्ली, एवं प्रो. दीपक मलिक, वाराणसी, का व्याख्यान आयोजित किया गया । व्याख्यान का विषय “ पं. जवाहरलाल नेहरू एवं भारतीय भाषाएं” था । इसमें काफी संख्या में शिक्षकों, शोधार्थियों, छात्राओं एवं छात्रों ने भागीदारी की । वरिष्ठ अध्येताओं के ज्ञान का लाभ विश्वविद्यालय के सभी वर्गों को प्राप्त हुआ ।
2. नेहरू अध्ययन केंद्र के द्वारा दिनांक 30 सितंबर 2010 को गांधी अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. दीपक मलिक द्वारा “गांधी नेहरू विमर्श” पर व्याख्यान दिया गया ।
3. नेहरू अध्ययन केंद्र के द्वारा दिनांक 05.01.2011 को हबीब तनवीर सभागृह में डॉ. श्रीनिवास खांदेवाले, नागपुर के व्याख्यान का आयोजित किया गया । व्याख्यान का विषय “ पं. जवाहरलाल नेहरू एवं भारतीय अर्थव्यवस्था” था । इसमें काफी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी, छात्रा, छात्रों ने भागीदारी की ।
4. महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग एवं नेहरू अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्वाधान में दिनांक 8-9 जनवरी 2011 को “मिशनरी पत्रकारिता : संदर्भ और प्रासंगिकता” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन हबीब तनवीर सभागृह में किया गया । इस कार्यक्रम में देश के लगभग सभी नामचीन मीडियाकर्मियों ने भारतीय परिप्रेक्ष्य में पत्रकारिता के महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचारों से लोगों को अवगत कराया ।
5. दिनांक 19-20 फरवरी 2011 को दलित आत्मकथा विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के साहित्य विद्यापीठ एवं नेहरू अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्वाधान में किया गया । कार्यशाला का विषय “दलित आत्मकथाऍं मनुष्य बनने की छ्टपटाहट : वर्ण व्यवस्था” था । इसमें देश के विभिन्न विद्वानों जिनमें सर्वश्री माता प्रसाद (पूर्व राज्यपाल,अरूणाचल प्रदेश), शरण कुमार लिंबाले, यशवंत मनोहर, प्रो.श्योराज सिंह बेचैन, डॉ. अजय नवारिया, डॉ. ओमप्रकाश वाल्मिकि, डॉ. सूर्य नारायण रणसूभे आदि विद्वानों ने भाग लिया ।
प्रौद्योगिकी अध्ययन केन्द्र
प्रौद्योगिकी अध्ययन केन्द्र (भाषा-प्रौद्योगिकी, अनुवाद प्रौद्योगिकी, सूचना-प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला) विश्वस्तरीय उच्चमानकता के साथ कम्प्यूटर विज्ञान, सूचना-प्रौद्योगिकी एवं इनके अनुप्रयुक्त क्षेत्र में प्रशिक्षण देने तथा गहन शोधकार्य करने हेतु अपनी अत्याधुनिक प्रयोगशाला के द्वारा भाषा-प्रौद्योगिकी, अनुवाद प्रौद्योगिकी और सूचना-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शोध एवं विकास की दृष्टि से को अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में स्थापित करने के लिए समर्पित हैं। इस केन्द्र की प्राथमिकता विश्वविद्यालय में प्रौद्योगिकी के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विकास से सम्बन्धित शिक्षा के अन्य अनुशासनों को मदद देने तथा ई-कैम्पस एवं ई-कल्चर को बढ़ावा देना भी है। इस केन्द्र में स्नातकोत्तर एवं शोध स्तरीय तथा सर्टिफिकेट एवं डिप्लोमा स्तरीय पाठयक्रम चलाए जाते हैं।
1. 1. मास्टर ऑफ इन्फॉरमेटिक्स एन्ड लैंग्वेज इंजीनियरिंग (एम.आई.एल.ई. )
इस पाठयक्रम के अंतर्गत भाषा से जुड़े सूचना एवं अभियांत्रिकी क्षेत्र का अध्ययन किया जाता है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में भाषा को लेकर नई अवधारणा का विकास करना है। इस पाठयक्रम में भाषा-अभियांत्रिकी एवं सूचना-प्रौद्योगिकी से संबध्द विविध प्रयोगात्मक क्षेत्रों के अध्ययन पर बल दिया जाएगा। 64 क्रेडिट का यह पाठयक्रम चार छमाहियों में पूर्ण होता है। इसके साथ ही कम्प्यूटर का अध्ययन अनिवार्य है, जो प्रत्येक छमाही में 2 क्रेडिट का होता है।
योग्यता :
(क) किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कम्प्यूटर विज्ञान या सूचना-प्रौद्योगिकी में न्यूनतम 50 प्रतिशत (अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए 45 प्रतिशत) अंकों के साथ स्नातक (10+2+3 पाठयक्रम) परीक्षा उत्तीर्ण। व अंग्रेजी भाषा का ज्ञान अनिवार्य।
अथवा
(ख) योग्यता (क) में निर्दिष्ट अनुशासन को छोड़कर अन्य किसी भी अनुशासन में किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से न्यूनतम 50 प्रतिशत (अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए 45 प्रतिशत) अंकों के साथ स्नातक (10+2+3 पाठयक्रम) उत्तीर्ण एवं कम्प्यूटर एप्लिकेशन/सूचना-प्रौद्योगिकी में डिप्लोमा।
शुल्क
- प्रवेश शुल्क : रु. 150.00
- छमाही शिक्षण शुल्क : रु. 500.00
- सुरक्षा शुल्क (प्रत्यर्पणीय) : रु. 250.00
- पुस्तकालय/प्रयोगशाला संरक्षण शुल्क : रु. 1500.00
- पुस्तकालय शुल्क (वार्षिक) : रु. 50.00
- खेलकूद शुल्क (वार्षिक) : रु. 50.00
- परिचय पत्र शुल्क : रु. 20.00
- सांस्कृतिक कार्यक्रम शुल्क : रु. 25.00
- इंटरनेट शुल्क (वार्षिक) : रु. 2500.00
- चिकित्सा शुल्क (वार्षिक) : रु. 50.00
- अकादमिक/परियोजना भ्रमण: रु. 110.00
- कुल : रु. 5205.00
1.2. पी-एच.डी. (इन्फॉरमेटिक्स एन्ड लैंग्वेज इंजीनियरिंग)
यह पाठयक्रम सूचना-प्रौद्योगिकी एवं भाषा-अभियांत्रिकी से संबध्द क्षेत्रों में अधुनातन शोध को प्रोत्साहित करने एवं नई अवधारणाओें का विकास करने।
योग्यता : (क) प्रोग्रामिंग भाषा की जानकारी के साथ किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कम्प्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स/ भाषा-प्रौद्योगिकी/ अनुवाद प्रौद्योगिकी में एम.ए. न्यूनतम 55 प्रतिशत (अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लिए 50 प्रतिशत) अंकों के साथ उत्तीर्ण ।
अथवा
(ख) किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से भाषाविज्ञान/अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान में एम.ए. न्यूनतम 55 प्रतिशत (अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लिए 50 प्रतिशत) अंकों के साथ उत्ताीर्ण एवं कम्प्यूटर विज्ञान/ सूचना-प्रौद्योगिकी में डिग्री/डिप्लोमा।
अथवा
(ग) किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कम्प्यूटर विज्ञान/सूचना-प्रौद्योगिकी में एम.टेक./ एम.सी.ए./एम.एस.सी. अथवा एम.आई.एल.ई. न्यूनतम 55 प्रतिशत (अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लिए 50 प्रतिशत) अंकों के साथ उत्तीर्ण ।
शुल्क
- पंजीकरण शुल्क : रु. 300.00 (केवल प्रवेश के समय)
- इन्टरनेट शुल्क : रु. 1500.00 (प्रति वर्ष)
- प्रयोगशाला संरक्षण शुल्क : रु. 1500.00 (प्रति वर्ष)
- पुस्तकालय शुल्क : रु. 300.00 (प्रति वर्ष)
- प्रतिभूति राशि : रु. 1000.00 (प्रतिदेय)
- परीक्षा शुल्क : रु. 1000.00 (शोध प्रस्तुति के समय)
- चिकित्सा शुल्क : रु. 50.00 (वार्षिक)
- कुल : रु. 5650.00
सर्टिफिकेट/डिप्लोमा
प्रौद्योगिकी अध्ययन केन्द्र द्वारा प्रौढ़ सतत शिक्षा विस्तार एवं सुदूर क्षेत्र केन्द्र के सहयोग से निम्नलिखित पाठयक्रम चलाए जा रहे हैं।
1.3 सर्टिफिकेट इन कम्प्यूटर एप्लिकेशन (सी.सी.ए.)
यह एक अंशकालिक पाठयक्रम है, जो 16 क्रेडिट का होता है जिसमें 4-4 क्रेडिट के तीन प्रश्न-पत्र एवं 4 क्रेडिट का परियोजना-कार्य होता है।
योग्यता :
किसी भी अनुशासन में 10+2 उत्तीर्ण।
शुल्क
- छमाही शिक्षण शुल्क : रु.1000.00
- प्रयोगशाला संरक्षण शुल्क : रु. 750.00
- परीक्षा शुल्क (प्रथम छमाही) : रु. 250.00
- कुल : रु.2000.00
1.4 डिप्लोमा इन कम्प्यूटर एप्लिकेशन (डी.सी.ए.)
यह एक वर्षीय अंशकालिक पाठयक्रम है, जो दो छमाही में पूर्ण होता है। 32 क्रेडिट के इस पाठयक्रम की प्रथम छमाही (सी.सी.ए.) में 16 क्रेडिट एवं द्वितीय छमाही में 16 क्रेडिट होते हैं, जिसमें 4-4 क्रेडिट के दो प्रश्न-पत्र एवं 8 क्रेडिट का एक परियोजना-कार्य होता है।
योग्यता :
डी.सी.ए. के लिए सी.सी.ए. उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।
शुल्क
- छमाही शिक्षण शुल्क : रु.2000.00
- प्रयोगशाला संरक्षण शुल्क : रु. 750.00
- परीक्षा शुल्क (प्रथम छमाही+द्वितीय छमाही): रु. 500.00
- कुल : रु.3250.00
भारतीय एवं विदेशी भाषा प्रगत अध्ययन केन्द्र
यह केन्द्र भारतीय एवं विदेशी भाषाओं एवं पारंपरिक संस्कृति की शिक्षा के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के अनुरूप भारतीयों तथा विदेशियों को शिक्षा देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। इस केन्द्र के अंतर्गत निम्नलिखित डिप्लोमा/ओरिएन्टेशन/ग्रीष्मकालीन पाठयक्रम चलाए जा रहे हैं।
1.4 डिप्लोमा इन कम्प्यूटर एप्लिकेशन (डी.सी.ए.)
यह एक वर्षीय अंशकालिक पाठयक्रम है, जो दो छमाही में पूर्ण होता है। 32 क्रेडिट के इस पाठयक्रम की प्रथम छमाही (सी.सी.ए.) में 16 क्रेडिट एवं द्वितीय छमाही में 16 क्रेडिट होते हैं, जिसमें 4-4 क्रेडिट के दो प्रश्न-पत्र एवं 8 क्रेडिट का एक परियोजना-कार्य होता है।
योग्यता :
डी.सी.ए. के लिए सी.सी.ए. उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।
शुल्क
- छमाही शिक्षण शुल्क : रु.1000.00
- परीक्षा शुल्क (प्रथम छमाही+द्वितीय छमाही): रु. 500.00
- कुल : रु.1500.00
1. 2 संस्कृत में डिप्लोमा
इस पाठयक्रम का उद्देश्य संस्कृत भाषा व साहित्य की सैद्धान्तिक एवं व्यावहारिक आधारभूत जानकारी देना है। पाठयक्रम सामग्री में प्राथमिक जानकारी से लेकर संभाषण तक को शामिल किया गया है। यह एक वर्षीय डिप्लोमा पाठयक्रम है।
योग्यता :
किसी भी विषय में 10+2 परीक्षा उत्तीर्ण ।
शुल्क
डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर दलित एवं जनजाति अध्ययन केन्द्र
केन्द्र के उद्देश्य :
- दलित एवं जनजाति अध्ययन की अवधारणा
- दलित एवं जनजाति अध्ययन की प्रकृति,क्षेत्र एवं गतिकी की समझ विकसित करना
- दलित एवं जनजाति अध्ययन को प्रासंगिक संदर्भ
- दलित एवं जनजाति अधिकारों की रक्षा हेतु नीति निर्माण
- दलितों एवं जनजातियों के सशक्तिकरण हेतु अम्बेडकर विचारों को समझना
- विभिन्न देशों के वंचित तबकों के बीच तुलनात्मक अध्ययन करना
गतिविधियां :
- एम.ए. एवं स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठयक्रम
- एम.फिल. एवं पी-एच.डी. निर्देशन
- दलित एवं जनजाति सम्बन्धी आंकड़ों का संग्रहण एवं डाटाबेस तैयार करना
- सरकारी संस्थाओं द्वारा जारी आंकड़ों का समाजार्थिक आधार पर विस्तृत अध्ययन करना
- दलित एवं जनजाति, अम्बेडकर विचारों से जुड़ें विषयों पर संगोष्ठी,परिसंवाद आदि आयोजित करना
- अकादमिक सदस्यों एवं विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त शोध निष्कर्षों का प्रकाशन
- महत्वपूर्ण विचारकों द्वारा भाषण
- भारत एवं विदेशों में अकादमिक आदान-प्रदान के जरिए युवा शोध-अध्येताओं को प्रोत्साहित करना
- भारत एवं विदेशों में दलितों एवं जनजातियों के सशक्तिकरण हेतु कार्यरत नागरिक समुदाय संस्थाओं से सम्पर्क
- जन प्रतिनिधियों, सरकारी कर्मचारियों एवं मीडिया सदस्यों हेतु उन्मुखीकरण कार्यक्रम
- दलित एवं जनजाति, अम्बेडकर विचारों से जुड़ें विषयों पर एक समृध्द पुस्तकालय की स्थापना
- दलितों एवं जनजातियों के सशक्तिकरण, अम्बेडकर विचारों से जुड़ें विषयों पर विभिन्न समूहो हेतु अल्पकालिक पाठयक्रम निर्माण
- अन्य विश्वविद्यालयों में दलित एवं जनजाति, अम्बेडकर विचारों से जुड़ें विषयों पर पाठयक्रम निर्माण एवं अन्य अकादमिक सहायता
- दलितों एवं जनजातियों के सशक्तिकरण, अम्बेडकर विचारों से जुड़ें विषयों को कार्यरूप प्रदान करने हेतु कार्ययोजना
3.1 एम. ए. दलित एवं जनजाति अध्ययन
में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दलित तथा जनजातीय अध्ययन को विस्तार देने की दृष्टि से एम.ए. दलित एवं जनजाति अध्ययन में दो वर्षीय पाठयक्रम चलाया जा रहा है। यह पाठयक्रम चार छमाहियों में पूरा होता है। यह पाठयक्रम 64 क्रेडिट का है। इसके साथ ही कम्प्यूटर का अध्ययन अनिवार्य है जो प्रत्येक छमाही में 2 क्रेडिट का है। इस पाठयक्रम में कुल 28 सीटें हैं।
योग्यता :
किसी भी अनुशासन में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक ;10+2+3 पाठयक्रमध्द परीक्षा उत्ताीर्ण। ;अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए 45 प्रतिशत
शुल्क
- प्रवेश शुल्क : रु. 150.00
- छमाही शिक्षण शुल्क : रु.500.00
- सुरक्षा शुल्क (प्रत्यर्पणीय) : रु.250.00
- पुस्तकालय/प्रयोगशाला संरक्षण शुल्क : रु.200.00
- पुस्तकालय शुल्क (वार्षिक) : रु. 50.00
- खेलकूद शुल्क ;वार्षिक : रु. 50.00
- परिचय पत्र शुल्क : रु. 20.00
- सांस्कृतिक कार्यक्रम शुल्क : रु. 25.00
- इंटरनेट शुल्क ;वार्षिक : रु.200.00
- चिकित्सा शुल्क ;वार्षिक : रु. 50.00
- अकादमिक/परियोजना भ्रमण : रु.110.00
- कुल : रु.1605.00
महात्मा गांधी फ्यूजी-गुरुजी शांति अध्ययन केन्द्र

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम के अंतर्गत वर्ष 2006 में विश्वविद्यालय के लक्ष्यों और उद्देश्यों की प्रतिपूर्ति के लिए नियम और परिनियम के आधार पर महात्मा गांधी फ्यूजीई गुरूजी सेन्टर फॉर पीस स्टडीज की स्थापना की गई। इस केन्द्र को MG-FG Centre for Peace Studies के नाम से विभूषित किया गया हैं।
केन्द्र का उद्देश्य देश और देश के बाहर शिक्षण, शोध को बढ़ावा देना है। विश्वविद्यालय इस केन्द्र के माध्यम से तुलनात्मक धर्म, संस्कृति, तथा शांति के विभिन्न परिप्रेक्ष में अनुसंधान करेंगा। गांधी विचार को ध्यान में रखकर अहिंसा, शांति, संघर्ष-समाधान और अंतरराष्ट्रीय संबंध आदि में भी पाठयक्रम संचालित करेगा। यह केन्द्र विद्यार्थियों और युवाओं के लिए सांस्कृतिक विनिमय (Cross-Cultural-exchange) समवाय बनेगा। संघर्ष-समाधान की पध्दतियाँ विकसित करेगा। मुख्यरूप से गांधीजी और फ्यूजीई गुरूजी के सिध्दान्तों को पाठयक्रम में विकसित करने के अलावा अहिंसा और शांति अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण्ा, संगोष्ठी, परिसंवाद, अंतर्संस्थानिक वादविवाद, व्याख्यान माला, पोस्टर प्रदर्शनी, आलेख प्रतियोगिता का आयोजन करेगा। एम. फिल्. और पीएच्.डी. के माध्यम से यह विभिन्न शोध कार्यक्रमों को भी संपंन्न करने के लिए बहुआयामि विकास का केन्द्र बनेगा।
महात्मा गांधी
विश्वभर में अहिंसा के प्रयोगकर्ता के रूप में महात्मा गांधी का नाम ख्यात है। दूनिया में अमन चैन रहे, इस उद्देश्य से गांधी का जीवन ही दुनिया के लिए संदेश है। जरूरत है उस संदेश को समझने की क्योंकि विकास का मौलिक स्वरूप तभी व्यवस्थित हो सकता है जब अंत:शांति अपने संगत स्वरूप में व्यवस्थित हो। गांधी चिंतन के परिप्रेक्ष में विश्व के तमाम विचाराकों ने यह व्यक्त किया है कि शांति और विकास सिनॉनिम्स (Synonymous) की तरह है। यह स्पष्ट है कि शांति के बिना विकास संभव नहीं है और विकास का आधार सामाजिक शांति है। अत: सामाजिक संरचना में शोषण के अवयव की गवेषणा ही शांति शोध है।
फ्यूजीई गुरूजी (Fuji Guruji)
निकीदात्सू फ्यूजीई गुरूजी (Nichidatsu Fuji Guruji) भारतीय धर्म संस्कृति से प्रभावित हो कर भारत आते है। जापानी बौध्द भिक्षू विश्वशांति के लिए विश्व भ्रमण पर निकलते हैं और अक्टूबर 1933 में महाराष्ट्र के वर्धा में महात्मा गांधी से उनकी मुलाकात होती है। गांधी उनकी जापानी प्रार्थना "Na-Mu-Myo-Ho-Rn-Ge-Kyo" से प्रभावित होते है और फ्यूजीई गुरूजी भी गांधी के विचार, व्यवहार और दर्शन से आपलावित हो कर वर्धा में गांधी के सूत्र संधान करते है। आगे चल कर फ्यूजीई गुरूजी भारत-जापान और संपूर्ण विश्व के लिए गांधी और बुध्द के तत्वों से मानवीय शांति के लिए अहिंसक बुनियाद की परिकल्पना में अपना जीवन समर्पण करते है।
महात्मा गांधी फ्यूजीई गुरूजी शांति अध्ययन केन्द्र द्वारा संचालित पाठयक्रम
समाज के लिए किया गया कार्य या समाज द्वारा किया गया कार्य समाज-व्यवस्था को व्यवस्थित रखने के लिए ही होता है। सामाजिक-संरचना में जो बदलाव आया है, वहाँ कहीं-न -कहीं टूटन, घूटन और शोषण में समाज विकृत भी हुआ है, अव्यवस्थित भी हुआ है और विकसित भी हुआ है। संरचना के साथ संगत बैठाना ही विकास की गांधीवादी व्यवस्था है। इसकी पूर्ति हेतु केन्द्र द्वारा स्नातकोत्तर समाजकार्य (MSW) का पाठयक्रम प्रारंभ किया गया है।
समाज कार्य में स्नातकोत्तर उपाधि
यह दो-वर्षीय पाठयक्रम है।
योग्यता : समाज कार्य/समाज विज्ञान/मानविकी अध्ययन में किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक ;10+2+3 पाठयक्रम परीक्षा उत्तीर्ण ।
शुल्क
- प्रवेश शुल्क : रु. 150.00
- छमाही शिक्षण शुल्क : रु.500.00
- सुरक्षा शुल्क (प्रत्यर्पणीय) : रु.250.00
- पुस्तकालय/प्रयोगशाला संरक्षण शुल्क : रु.200.00
- पुस्तकालय शुल्क (वार्षिक) : रु. 50.00
- खेलकूद शुल्क ;वार्षिक : रु. 50.00
- परिचय पत्र शुल्क : रु. 20.00
- सांस्कृतिक कार्यक्रम शुल्क : रु. 25.00
- इंटरनेट शुल्क ;वार्षिक : रु.200.00
- चिकित्सा शुल्क ;वार्षिक : रु. 50.00
- अकादमिक/परियोजना भ्रमण : रु.110.00
- कुल : रु.1605.00
संकाय सदस्य
प्रो. मनोज कुमार
प्रोफेसर/निदेशक
शैक्षणिक योग्यता
एम.ए. (गांधी विचार) एल.एल.बी., पीएच्.डी.
पता :
महात्मा गांधी फ्यूजीई गुरूजी शांति अध्ययन केन्द्र
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय,
पंचटिला हिल्स, वर्धा-442001 (महाराष्ट्र)
दूरभाष :
07152-201575
चलितभाष :
09975323109
ई-मेल :
director.mgfgps@hindivishwa.org
संचार एवं मीडिया अध्ययन केन्द्र
संचार माध्योमों में नितदिन होने वाली तकनीक समृद्धि और वैचारिक संमपन्नता को शिक्षण–प्रशिक्षण एवं गहन शोध की दृष्टि में शामिल करना तथा मीडिया के बदलते स्वनरूप के समानांतर व्यावहारिक ज्ञान मीमांसा से भविष्यतगामी रूपरेखा को तैयार करना इस केंद्र का प्रखुम उद़देश्यह है।
वैश्विक संचार व्यवस्था में रोजगारपरक पाठ़यक्रमों का संचालन और संभावनाओं को विद्यार्थियों व शोधार्थियों के लिए उपलब्धै कराना इस केंद्र का विस्तार है।
केंद्र द्वारा संचालित पाठ्यक्रम -
यह एक वर्षीय अंशकालिक पाठयक्रम है, जो दो छमाही में पूर्ण होता है। 32 क्रेडिट के इस पाठयक्रम की प्रथम छमाही (सी.सी.ए.) में 16 क्रेडिट एवं द्वितीय छमाही में 16 क्रेडिट होते हैं, जिसमें 4-4 क्रेडिट के दो प्रश्न-पत्र एवं 8 क्रेडिट का एक परियोजना-कार्य होता है।
- एम. ए. जनसंचार
कुल सीटें 28, योग्यशता – किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी अनुशासन में स्नातक 40 प्रतिशत अंको के साथ उत्तीर्ण (अनु. जाति व अनु. जनजाति के लिए 35 प्रतिशत)
- एम. फिल. जनसंचार
कुल सीटें 14, योग्यरता – किसी भी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से संबद्ध अनुशासन में स्नातकोत्तर 55 प्रतिशत अंको के साथ उत्तीर्ण (अनु. जाति व अनु. जनजाति के लिए 50 प्रतिशत)
- पीएच-डी. जनसंचार
योग्यता – किसी भी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से संबद्ध अनुशासन में स्नातकोत्तर 55 प्रतिशत अंको के साथ उत्तीर्ण (अनु. जाति व अनु. जनजाति के लिए 50 प्रतिशत)
वांक्षनीय – संबद्ध अनुशासन में जेआरएफ/नेट/एम.फिल.
डिप्लोमा पाठ्यक्रम -
- टेलीविजन कार्यक्रम निर्माण में स्नातकोत्तर डिप्लोमा
- वेब पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा
- प्रसारण माध्यामों में स्नातकोत्तर डिप्लोरमा
- विज्ञापन एवं जनसंपर्क में स्नातकोत्तर डिप्लोमा
- ग्राफिक्सए एवं एनिमेशन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा
- वीडियोग्राफी एवं वीडियो संपादन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा
प्रत्येक डिप्लोमा में सीटों की संख्या 15 है।
योग्ययता – किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी अनुशासन में स्नातक डिग्री उत्तीर्ण
गतिविधियां –
- मीडिया संस्थासनों का शैक्षिक भ्रमण
- समाचारपत्र 'नवसंप्रेषण' का प्रकाशन : विद्यार्थियों के लिए प्रयोगार्थ
- संगोष्ठियों एवं कार्यशालाओं का आयोजन
- 'मीडिया संवाद' बैनर तले शिक्षाविद्व, मीडियाविद्व व चिंतकों द्वारा मार्गदर्शन
- विद्यार्थियों को मीडिया के सभी क्षेत्रों में इंटर्नशिप
केंद्र के संकाय सदस्यवगण –
- प्रो. (डॉ.) अनिल के. राय 'अंकित' – प्रोफेसर एवं निदेशक
- डॉ. कृपाशंकर चौबे – रीडर
- श्री धरवेश कठेरिया – असिस्टें ट प्रोफेसर
- डॉ. अख्तयर आलम - असिस्टें ट प्रोफेसर
- श्री संदीप कुमार वर्मा - असिस्टें ट प्रोफेसर
- श्री राजेश लेहकपुर - असिस्टें ट प्रोफेसर
- श्रीमती रेणु सिंह - असिस्टें ट प्रोफेसर